मोतिहारी : बैंक अधिकारियों एवं कृषकों के लिए कामधेनु है किसान क्रेडिट कार्ड(केसीसी) ऋण. इसमें बैंक अधिकारी व किसान दोनों को फायदा होता है. मिसाल के तौर पर किसान के पास एक इंच जमीन नहीं होने के बावजूद भी बैंक अधिकारी लेन-देन कर यह ऋण मुहैया करा देते हैं.
वर्षों बाद दूसरे अधिकारी आते हैं तो उक्त व्यक्ति का जांच पड़ताल करते हैं. उनपर मुकदमा दायर करते हैं लेकिन उनके पास न इज्जत की चिंता. न फिक्र है कि कोई अपमान की जय बोलो बेईमान की वाली स्थिति उत्पन्न हो जाती है. जेल भी जाये तो कोई फर्क नहीं पड़ता. चूंकि उनके पास खोने का कोई गम नहीं, पाने का कोई गम नहीं.
बैंकों के ऋण देने के लक्ष्यों का निर्धारण: पूर्वी चंपारण जिला के 235 शाखाओं को 68057 लोगों के बीच 63006 लाख रूपया का केसीसी ऋ ण वितरणा करने का लक्ष्य दिया गया, जिसमें सितंबर 15-16 तक 110049 लोगों के बीच 63079 लाख रूपया का ऋण वितरण किया गया, जिसमें नया केसीसी ऋण 10126 लोगों के बीच 9590 लाख का ऋण वितरण किया गया. 99923 पुराने ऋणधारकों को रिन्यूअल करते हुए 53489 लाख का केसीसी ऋण वितरण किया गया.
ऋण देने में ग्रामीण बैंक रहा अव्वल: पूर्वी चंपारण जिला में उतर बिहार ग्रामीणा बैंक अपनी 86 शाखाओं के माध्यम से कुल 52136 लोगों के बीच 44144 लाख रूपये का केसीसी ऋण वितरण करने की स्वीकृति दी गयी, जबकि यह बैंक 2388 नये लोगों को केसीसी ऋण वितरण करने की स्वीकृति प्रदान की.
वहीं पुराने 49743 लोगों को 40687 रूपया का केसीसी वितरण की स्वीकृति प्रदान की. वहीं स्टेट बैंक ने 10092 लोगों के बीच 6173 लाख का केसीसी ऋण वितरण् करने की स्वीकृति प्रदान कर दूसरे नंबर पर रहा, जबकि सेंट्रल बैंक ने 3957 लोगों के बीच 3205 केसीसी ऋण वितरण करने की स्वीकृति प्रदान कर तीसरे पायदान पर रहा.
