मौत से मचा कोहराम

मोतिहारी : मुजफ्फरपुर-नरकटियागंज रेलखंड स्थित मानवरहित रेल फाटक अब तक दर्जनों हादसों का गवाह बन चुका है़ रेलखंड पर एक-एक कर घटनाओं की लंबी फेहरिस्त बनती जा रही है़ मानवरहित रेल फाटक पर ट्रेन के पहियों के नीचे आकर कई लोगों की जाने जा चुकी है़ बावजूद रेल प्रशासन इन हादसों से सबक नहीं ले […]

मोतिहारी : मुजफ्फरपुर-नरकटियागंज रेलखंड स्थित मानवरहित रेल फाटक अब तक दर्जनों हादसों का गवाह बन चुका है़ रेलखंड पर एक-एक कर घटनाओं की लंबी फेहरिस्त बनती जा रही है़ मानवरहित रेल फाटक पर ट्रेन के पहियों के नीचे आकर कई लोगों की जाने जा चुकी है़ बावजूद रेल प्रशासन इन हादसों से सबक नहीं ले रहा़

घटनाओं के बाद रेल प्रशासन कार्रवाई कर पल्ला झाड़ लेती है़ हादसों के प्रति प्रशासन की गंभीरता महज घटनाओं के जांच तक ही दिखती है़ उसके बाद गुजरते समय के दौर के साथ मामला प्रशासनिक संचिकाओं में गुम हो जाता है़ ऐसे एक नहीं कई हादसे है़

रेल प्रशासन नहीं है सजग
मानवरहित रेल फाटकों पर एक के बाद एक कर हो रही घटनाओं के बावजूद रेल प्रशासन सुरक्षा के प्रति लापरवाह बना हुआ है़ मानवरहित फाटकों पर सावधानी गयी दुर्घटना हुई जैसे स्लोगन लिखा बोर्ड लगाकर अपनी जवाबदेही निर्वाह्न की खानापूर्ति होती है़ जबकि रेल फाटक पर यह स्लोगन नहीं लिखा है़ रेल दुर्घटनाओं को रोकने के लिए रेल प्रशासन का जागरूकता अभियान भी दम तोड़ने लगा है़
20 वर्ष पुराना है मैनुअल
20 साल पहले ट्रैफिक लोड के हिसाब से बना रेल फाटक आज भी पुराने ढर्रे पर चल रहा है़ जानकार बताते है कि ट्रैफिक लोड के मुताबिक तब रेल फटक को तीन श्रेणी में बांटा गया था़ तब आबादी का घनत्व कम था़ उस वक्त ए, बी एवं सी श्रेणी में रेल फाटक सिग्नल से प्रोटेकट है़ जबकि सी ग्रेड की फाटक प्रोटेक्ट नहीं है़
सी श्रेणी में ही मैन फाटक व अनमैन फाटक रखा गया है़ आज की आबादी 20 वर्ष पहले की तुलना में चार गुणा बढी है़ बावजूद अनमैन फाटक पर सुरक्षा का कोई इंतजाम नहीं है़
मुजफ्फरपुर-नरकटियागंज एवं सुगौली-रक्सौल रेलखंड पर औसतन प्रत्येक ढाई किलोमीटर पर एक मानव रहित फाटक है़ इसमें मुजफ्फरपुर-नरकटियागंज को 160 किलोमीटर लंबी रेलखंड के बीच 57 मानवरहित रेल फाटक है़
जबकि सुगौली-रक्सौल के 28 किमी की दूरी के बीच मानवरहित रेल फाटकों की संख्या 15 है़

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