मोतिहारी : शहर के भवानीपूर जिरात में कुड़िया मेला बुधवार से शुरू हो गया.कार्तिक पूर्णिमा के अवसर पर प्रति वर्ष लगने वाले इस 15 दिवसीय मेले में लकड़ी व मिट्टी के बने घरेलू व कृषि उपकरण आकर्षण का खास केंद्र बना हुआ है.बच्चों के लिए चरखा व लकड़ी का बना तीन पहिया व चार पहिया वाहन भी मेले में बेचे जा रहे हैं.आधुनिकता के दौर में भी यह मेला अपने पुराने मूल स्वरूप में है और इस मेले का हर व्यक्ति को इंतजार रहता है.नेपाल समेत सीमावर्ती जिलों के लोग खरीदारी करने पहुंचते हैं और अपने मनपसंद की वस्तुएं खरीदते है.
15 दिवसीय कुड़िया मेला शुरू, जुटे लोग
मोतिहारी : शहर के भवानीपूर जिरात में कुड़िया मेला बुधवार से शुरू हो गया.कार्तिक पूर्णिमा के अवसर पर प्रति वर्ष लगने वाले इस 15 दिवसीय मेले में लकड़ी व मिट्टी के बने घरेलू व कृषि उपकरण आकर्षण का खास केंद्र बना हुआ है.बच्चों के लिए चरखा व लकड़ी का बना तीन पहिया व चार पहिया […]

दो सौ साल पुराना है मेला
जानकार बताते हैं यह मेला दो सौ वर्षो से लग रहा है.इस मेला की अपनी एक अलग धार्मिक मान्यताएं हैं.मान्यता के अनुसार, कुड़िया देवी नामक एक महिला रहती थी और हमेशा पूजा पाठ में लीन रहती थी.भूखों को भर पेट खाना खिलाती थी जिससे लोगों का झुकाव उनकी ओर काफी बढ गया.शरीर छोड़ने पर जहां वह पूजा करती थीं उसी स्थान पर पूजा की जाने लगी.उस समय एक ही दिन मेला लगता था और लोग दिन भर पूजा-अर्चना करते थे.बाद के दिनों में यह मेला 15 दिनों के लिए कर दिया गया.जिस मंदिर में वह पूजा करती थी उस मंदिर का वास्तविक स्वरूप अभी है.हालांकि बगल में भव्य मंदिर बन गयी है.