बेतिया : जीएमसीएस सह एमजेके सदर अस्पताल में तोड़-फोड़ करने वालों में गुस्सा यूं ही नहीं था. दुर्घटना में घायल युवक आॅखों के सामने तड़प रहा था, परिजन डॉक्टर-डॉक्टर चिल्ला रहे थे.
लेकिन जिले के सबसे बड़े इस सरकारी अस्पताल में एक भी डॉक्टर मौजूद नहीं मिला.
बेलगाम स्टॉफ-कर्मी भी डॉक्टर की गैरमौजूदगी से घायल का इलाज नहीं कर रहे थे. ऐसा नहीं है कि जीएमसीएच में डॉक्टरों की कमी से यह हुआ हैं. बल्कि मेडिकल कॉलेज में दस, बीस नहीं कुल 167 डॉक्टर की तैनाती हैं.
इसमें से करीब 30 विशेषज्ञ व सर्जन चिकित्सकों की तैनाती हैं. लेकिन कभी-कभार ही यह ड्यूटी पर आते हैं.
सोमवार की शाम हुई तोड़फोड़ की घटना में भले ही अस्पताल और मेडिकल कॉलेज प्रबंधन डॉक्टर को आरोपित बना रहा हैं, लेकिन इसमें कमी प्रबंधन की हैं. प्रबंधन का ही अपने डॉक्टरों व स्टॉफ पर नियंत्रण नहीं हैं.
