बनकटवा : नेपाल की राजधानी काठमांडू में विभिन्न व्यवसायियों से जुडकर अपनी जिंदगी को इंद्रधनुषी बनाने का ख्वाब पाले लोग भूकंप के रूप में कुदरती त्रसदी ङोल आंखों में आंसू और दिल में दहशत लिये टूटे अरमानों के साथ भारत-नेपाल सीमावर्ती क्षेत्र के लोग अब घर लौटने लगे हैं.
काठमांडू में मौत का मंजर देखने के बाद खौफजदा लोग नियति को मात देकर अब अपने परिजनों के बीच है, लेकिन अभी भी उसके मन से भय और सिहरन नहीं निकल पा रह़े आंखों से नींद उड चुकी है. भूख-प्यास और बेचैनी चेहरे पर साफ झलकती है. इसके बावजूद अपनों के बीच प्रलयंकारी भूकंप के अतीत को भूला देने पर अमादा है.
सही सलामत घर लौटने पर लोग भगवान पशुपति नाथ की कृपा मान रहे हैं. काठमांडू से अपने घर लौटे बीजबनी के देवपूजन यादव और बनकटवा के कौशलकिशोर प्रसाद सहित कई लोगों ने बताया कि भूकंप के बाद घाटी में जन-जीवन पूरी तरह से अस्त-व्यस्त है. मोबाइल रिचाजर्, पानी, राशन, दवा आदि का मिलना मुश्किल हो गया है.
मलबों के नीचे अभी भी हजारों लोग फंसे हो सकते हैं. दहशत के मारे लोग भारी तूफान और बारिश में भी अपने घरों में न जाकर खुले में रात बिताने को मजबूर हैं. ऐसे में पीएम मोदी द्वारा तत्काल प्रभाव से नेपाल को हरसंभव मदद देना एक अच्छे पडोसी होने के साथ इंसानियत और मानवता के धर्म को एक बार फिर पूरे विश्व में प्रतिष्ठित कर दिया है.
