खुले जगहों पर जाकर ठहरे, शाम तक लोग घरों से रहे बाहर
रक्सौल : रक्सौल बाजार ग्राहकों से अभी गुलजार हो ही रहा था कि भूकंप के झटकों ने अफरा-तफरी मचा कर रख दिया. भागो-बचाओ की शोर और अपने को साथ लेकर निकलने की जद्दोजहद में शहर की संकीर्ण गलियां एका-एक लोगों से भर गयी. लोगों को यह समझ नहीं आ रहा था कि वे बीच बाजार से किधर निकले, कहां जाये.
शहर के लोग ऊं ची-ऊं ची इमारतें बना लिये हैं और इमारतों की बीच पतली सड़क है, जिसे छज्जा और छत निकाल कर और भी पतला कर दिया है. सुबह लगभग 12 बजे आये भूकंप ने लोगों के बीच का भेद मिटा दिया.
क्या पुरुष, क्या महिलाएं, युवती और युवक सभी घर से निकल कर इन सड़कों पर आ गये और सभी एक तरफ भागने लगे. लोग भागते-भागते रेलवे की खाली जमीन पर पहुंचे, हालांकि तब तक भूकंप का झटका रुका नहीं था और लोग परेशान थे. लगभग दो मिनट तक रहने वाले इस भूकंप के बाद भी लोग परेशान रहे. फिर गरम हुआ अफवाहों का बाजार. कहीं मुहल्ले में घर गिर गया, तो घर टेढ़ा हो गया. ऐसा ही एक अफवाह बैंक रोड के लिए निकली कि बैंक रोड़ में एक पांच मंजिला इमारत टेढ़ा हो गया है, गिर गया है.
फिर क्या था पूरा शहर बैंक रोड की तरफ उमड़ गया. इसी बीच अभी लोग संभल पाते. महिलाएं अपने बच्चों के साथ घरों में जा ही रही थी, स्कूल से अभिभावक अपने बच्चे को ला ही रहे थे कि एक बार फिर भूकंप का झटका आया और सभी लोग हाहाकार मचाते हुए अपने घरों से भागने लगे. खबर लिखे जाने तक लोग अपने घरों के पास तो पहुंच गये है, लेकिन घर के अंदर जाने से कतराते दिखे. बाहर या दरवाजे के पास ही बैठे है कि कहीं फिर से भूकंप आ जाये तो भागना पड़ेगा.
बंद हो गयी दुकानें
दो बार भूकंप आने के बाद शहर के व्यवसायी अपनी-अपनी दुकान बंद कर दिये. जिससे पूरे बाजार में सन्नाटा पसरा हुआ है. नेपाली क्षेत्र या सुदूर वर्ती गांवों से जो ग्राहक रक्सौल बाजार के लिए आये थे, सभी लोग लौट कर अपने-अपने घरों को जा चुके थे. सभी के अंदर के एक ही भाव था कि इस विषम परिस्थिति में अपने परिवार के साथ रहे.
स्कूल बंद
भूकंप के झटका आने के बाद शहर के विद्यालयों में अफरा-तफरी मच गयी. स्कूल प्रबंधन जल्दी-जल्दी छोटे-छोटे बच्चों को अपने-अपने भवन से निकालकर विद्यालय के मैदान में एक जगह किये. ये बच्चे जो कभी भूकंप देखे नहीं थे, समझ नहीं पा रहे थे रो रहे थे. धीरे-धीरे अभिभावक विद्यालय पहुंच कर अपने बच्चों को घर ले गये तो विद्यालय के वाहन सभी बच्चों को घर पहुंचाने में जूट गये.
दूरसंचार व्यवस्था ठप
पहली बार भूकंप का झटका आने के साथ ही सभी मोबाइल का नेटवर्क गायब हो गया. जिसके कारण घर से बाहर बाजार में आये लोग घर के लोगों का समाचार जानने के लिए बेचैन दिखे. लोगों की परेशानी इस कारण से भी अधिक हो गयी थी, वे अपने घर के लोगों का हाल नहीं जान पा रहे थे.
बैंक बंद लौटे घर
भूकंप के झटके के बाद बाजारों की तरह शहर के सभी बैंकों में भी अफरा-तफरी मच गयी. बैंककर्मी अपना काम छोड़ अपना जीवन बचाने में लगे रहे. वहीं बैक परिसर में जमा-निकासी के लिए पहुंचे लोग भी अपनी जान बचाने के लिए सुरक्षित स्थानों की ओर भागने लगे.
सेफ स्थानों पर जमावड़ा
शहर के सभी सुरक्षित स्थानों पर लोगों का जमावड़ा घंटों देखा गया. शहर के नागा रोड़ स्थित रीट कंप्यूटर के समीप, मौजे माई स्थान मंदिर परिसर, रेलवे परिक्षेत्र, हजारीमल उच्च विद्यालय परिसर, आर्य समाज परिसर, स्टेशन परिक्षेत्र सहित शहर के विभिन्न जगहों पर लोग घंटों जमे रहे.
निकाले गये मरीज
शहर के डंकन अस्पताल में भरती मरीजों को भी भूकंप के बाद सुरक्षा के मद्देनजर बाहर निकाल लिया गया. अस्पताल के कर्मी गंभीर मरीजों को स्ट्रेचर व ट्रॉली से बाहर कर रहे थे तो हलके बीमार मरीजों को उनके परिजन अस्पताल से बाहर निकालने में जुटे दिखे. भूकंप के समय मरीजों को भोजन कराने का समय था. परिजन मरीजों के लिए भोजन लाने व खिलाने में जुटे थे. इसी बीच भूकंप आने से लोग इधर उधर भागने लगे. अस्पताल परिसर में मरीज भूकंप के रूकने के बाद भोजन करते दिखे.
अलर्ट रहने की अपील
भूकंप के पहले झटके के बाद स्थानीय अधिकारी भी लोगों की सुरक्षा व जागरूकता के लिए लोगों से अपील करते दिखे. भूमि सुधार उपसमाहर्ता संजय कुमार मोटरसाइकिल से घूम-घूम कर लोगों से सुरक्षित स्थान पर रहने की अपील करते दिखे. वे अपने एक सहयोगी के साथ मोटरसाइकिल से भ्रमण करते दिखे. उन्होंने दूसरी बार भूकंप आने की संभावना की सूचना दे रहे थे. श्री कुमार शहर के सभी छोटे-बड़े चौक -चौराहों पर लोगों को एक-दूसरे से सुरक्षित स्थानों पर रहने की अपील की.
