रक्सौल : कार्यपालक पदाधिकारी द्वारा निजी वाहन के व्यावसायिक इस्तेमाल कर नगर परिषद से भाड़ा भुगतान को लेकर शहर के युवा समेत कई लोगों ने अपनी प्रतिक्रिया दी है. ‘प्रभात खबर’ के गुरुवार के अंक में प्रकाशित खबर ‘टैक्स चोरी करते है नगर परिषद के इओ’ पर लोगों का कहना है कि नगर परिषद के इस नियम विरुद्ध व सरकार के टैक्स चोरी पर कार्रवाई होनी चाहिए.
युवा व्यवसायी सुमित सर्राफ ने कहा कि कार्यपालक पदाधिकारी को कम से कम अब शीघ्र ही उस निजी नंबर की बोलेरो को छोड़ देना चाहिए. नगर परिषद को तो किराया देना है, उन्हें टैक्सी नंबर वाहन को किराया पर लेना चाहिए.
चंद्रशेखर कुमार ने कहा कि कार्यपालक पदाधिकारी को स्वयं बोलेरो को 2009 से अब तक जो फाइन बनता है, जोड़ कर देने को कहना चाहिए. क्योंकि बोलेरो मालिक प्रतिमाह भाड़ा के रूप में 18 हजार रुपया प्राप्त कर रहे हैं, जो ऑन रिकार्ड है. ऐसे में उस अवधि का जो व्यवासायिक टैक्स होता है, देना चाहिए.
शाहिद कुमार का कहना है नप ने जानबूझ कर निजी वाहन किराये पर लिया था या गलती से इसकी जांच होनी चाहिए. नारायण कुमार का कहना है कि वर्ष 2009 से अब तक बोलेरो साल दर साल पुराना होता गया, जबकि किराया ज्यों का त्यों रहा. आखिर पांच साल में वाहन बदला क्यों नहीं गया.
जब किराया दिया जा रहा है.राजद नेता रमेश कुमार सिंह का कहना है कि बड़ी अनियमितता है. सरकार के अधिकारी व सरकारी संस्था आखिर क्यों सरकार की टैक्स चोरी कर रही है.
उन्होंने कहा कि इसका तो साफ मतलब है कि सरकार के अधिकारी के लिए कुछ और कानून और आम जनता के लिए कुछ और कानून हमने डीटीओ को लिख कर दिया है कि कार्रवाई करें. अन्यथा की स्थिति में आम जन की वाहन का निजी निबंधित है, उसका व्यावसायिक इस्तेमाल होने पर कार्रवाई नहीं हो. अनिल कुमार सिन्हा ने कहा कि जो लोगों को टैक्स भरने के लिए नप क्षेत्र में प्रचार- प्रसार कराने का काम करते हैं और कहते हैं कि टैक्स नहीं जमा करने वालों पर प्राथमिकी होगी.
तो ऐसे में नप के कार्यपालक पदाधिकारी व टैक्स चोरी करने वाले वाहन मालिक सहित इसमें संलिप्त सभी लोगों पर सरकारी राजस्व के चुना लगाने के आरोप में प्राथमिकी दर्ज होनी चाहिए.
