अब सीमेन से पूर्वी चंपारण में हाेगा मछली उत्पादन

लखनऊ के वैज्ञानिक सीमेन प्रोडक्ट की कर रहे मॉनीटिरंग परीक्षण को कल आयेगी लखनऊ के वैज्ञानिकों की टीम बरियरिया में छह से बढ़ 19 एकड़ में हो रहा उत्पादन कार्य नर मछली का सीमेन निकाल वैज्ञानिक कर रहे हैं परीक्षण मोतिहारी :देश के 17 स्थानों में बिहार पूर्वी चंपारण का बरियरिया भी शामिल हो गया […]

लखनऊ के वैज्ञानिक सीमेन प्रोडक्ट की कर रहे मॉनीटिरंग

परीक्षण को कल आयेगी लखनऊ के वैज्ञानिकों की टीम
बरियरिया में छह से बढ़ 19 एकड़ में हो रहा उत्पादन कार्य
नर मछली का सीमेन निकाल वैज्ञानिक कर रहे हैं परीक्षण
मोतिहारी :देश के 17 स्थानों में बिहार पूर्वी चंपारण का बरियरिया भी शामिल हो गया है, जहां मछली पालन के क्षेत्र में सीमेन सिस्टर तकनीक विकसित की जा रही है.
बिहार में ऐसे दो स्थान है, जिसमें संग्रामपुर का बरियरिया एक है. लखनऊ अनुवांशिक मत्स्य संस्थान की टीम पशु की तरह मछली का भी सीमेन निकाल कर मादा मछली में यहां प्रयोग किया, जो सफल रहा. फिर लखनऊ की टीम 12 अगस्त को बरियरिया पहुंच रही है, जहां दूसरी दफा सीमेन का परीक्षण व प्रयोग किया जायेगा.
इस तरह अब पशुओं की तरह नर मछली से सीमेन निकाल मादा मछली को सीमेन देकर मछली बीज का उ‍त्पादन होगा, जो मछली उत्पादन के क्षेत्र में क्रांति कहीं जायेगी. बरियरिया के मछली पालक किसान यतेंद्र कश्यप ने बताया कि इस सिस्टम से हैचरी की जरूरत नहीं पड़ेगी और मछली का उत्पादन भी होगा.
अब तक हैचरी सिस्टम से ही मछली बीज का उ‍त्पादन होता रहा है. जिला मत्स्यपालन पदाधिकारी शैलेश सिंह ने बताया कि पूर्वी चंपारण में करीब 15 हैचरी है. सरकारी और गैरसरकारी तालाबों की संख्या करीब सात हजार है और झील 13 है. यहां की जलवायु व मिट्टी मत्स्य उत्पादन के लिए वैज्ञानिक दृष्टिकोण से उपयोगी है. हाल ही में हैदराबाद की टीम बरियरिया हैचरी व तालाब का निरीक्षण कर मछली उत्पादन को सराहनीय बताया.

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By Prabhat Khabar Digital Desk

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