स्वकर निर्धारण की धीमी गति से राजस्व का नुकसान
मोतिहारी : शहरी होल्डिंग के स्वकर निर्धारण की गति काफी धीमी है. अपने संपत्ति का स्वयं निर्धारण कर टैक्स देने की व्यवस्था में शहरवासी सहयोग नहीं कर रहे हैं, तो दूसरी ओर कर निर्धारण एवं वसूली में कर संग्राहकों की मनमानी रवैये से नप लगातार पिछड़ रहा है. जिसका खासा असर नप के राजस्व वसूली पर पड़ी है. राजस्व वसूली में आयी कमी का शहरी विकास कार्य योजनाओं पर गहती असर पड़ी है.
बताते चले कि नगर परिषद में स्वकर निर्धारण की व्यवस्था नगर आवास एवं विकास विभाग ने चार साल पहले वित्तीय वर्ष 2013-14 में शुरू की. इस नियम के प्रभावी तौर पर लागू होने के बाद होल्डिंग
धारक को अपने संपत्ति की घोषणा करते हुए स्वकर प्रपत्र भरना अनिवार्य कर दिया गया. लेकिन चार साल पहले शुरू हुई इस व्यवस्था को मोतिहारी नप में शत-प्रतिशत लागू नहीं हो सकी. शुरू के वर्ष में स्वकर को लेकर कुछ सख्ती रही, लेकिन इन दिनों व्यवस्था पूरी तरह बेपटरी हो गयी है. इसका एक कारण गत वर्ष में इओ के सेवाकाल तो दूसरा निकाय चुनाव मानी जा रही है. पिछले एक वर्ष में तीन इओ के स्थानांतरण से कर संग्रहण कार्य काफी प्रभावित हुआ. इसी बीच निकाय चुनाव की शोर में कर संग्रहण की ठीक से मॉनीटरिंग नहीं हो सकी. लिहाजा कर संग्रहण में सूबे का वन टू थ्री के पोजिशन रखने वाला मोतिहारी नप को दहाई अंक में भी स्थान नहीं मिली.
2017-18 में मात्र 2250
स्वकर निर्धारण की गति से यह साफ है कि कर संग्रहण में कर संग्राहक मनमानी रवैये अपना रहे हैं. जानकारी के मुताबिक चालू वित्तीय वर्ष 2017-18 में मात्र अबतक 2250 होल्डिंग कर का स्वकर प्रपत्र ही भरा जा सका है. जबकि पिछले साल वर्ष 2016-17 में स्वकर प्रपत्र का आंकड़ा महज 2130 रही. दोनों वर्ष में कूल मिला कर 2480 स्वकर प्रपत्र भरे गये हैं.
इओ ने लिया संज्ञान
धीमी रफ्तार पर संज्ञान लेते हुए इओ ने कर संग्राहकों की क्लास लगानी शुरू कर दी है. नप राजस्व को बढ़ाने के लिए कर संग्राहकों के कार्य में बदलाव किया गया है. कर संग्राहकों को स्पष्ट निर्देश दिया गया है कि, सुबह फिल्ड में काम करे,और शाम तीन बजे के बाद कार्यालय में ड्यूटी करेंगे. ताकि इस दौरान कार्यालय आनेवाले होल्डिंग धारक अपने कर को जमा कर सके.
विडंबना
कभी वन टू थ्री के पोजिशन में रहता था
वेतन व कमीशन पर लगायी रोक
कर संग्रहण का डिमांड नहीं जमा करने के मामले को इओ हरिवीर गौतम ने गंभीरता से लिया है. डिमांड नहीं जमा करने वाले तीन कर संग्राहकों के वेतन एवं कमीशन पर रोक लगाने का निर्देश दिया है. मामले में डिमांड जमा नहीं करने तक संबंधित कर संग्रहाकों को नहीं तो वेतन मिलेगी और न ही कमीशन.
