Buxar News: या देवी सर्वभूतेषु शक्ति रूपेण संस्थिता...

Buxar News: शक्ति की अधिष्ठात्री मां दुर्गा की आराधना का महापर्व वासंतिक नवरात्र का श्रीगणेश रविवार को हो गया

बक्सर

. शक्ति की अधिष्ठात्री मां दुर्गा की आराधना का महापर्व वासंतिक नवरात्र का श्रीगणेश रविवार को हो गया. इस अवसर पर वैदिक विधि-विधान के साथ कलश स्थापना की गई तथा मंत्रोच्चार के बीच देवी दुर्गा के प्रथम स्वरूप मां शैलपुत्री की उपासना के उपरांत दुर्गा सप्तशती का परायण यानि पाठ किया गया.

मंदिरों से लेकर घरों तक में “या देवी सर्वभूतेषु शक्ति रूपेण संस्थिता…आदि मंत्रों तथा शंख व घंटे-घड़ियालों की ध्वनि गूंजने लगीं. वैदिक मंत्रोच्चार के बीच पूजा-पाठ होने से शहर समेत जिले भर का माहौल भक्तिमय हो गया. बासंतिक नवरात्र का शुभारंभ चैत्र मास के शुक्लपक्ष की प्रतिपदा तिथि एवं समापन नवमी तिथि को होता है. इस बीच भक्ति भाव के साथ श्रद्धालु मां भगवती की उपासना करते हैं. कतिपय भक्त उपवास के साथ व्रत रखकर शक्ति की आराधना करते हैं और नवमी को हवन-पूजन के साथ नौ दिवसीय अनुष्ठान संपन्न करते हैं. पूजन-अर्चना को मंदिरों उमड़ा आस्था का सैलाब : नवरात्रि व नव संवत्सर के अवसर पर पूजन-अर्चन को लेकर मंदिरों में आस्था का सैलाब उमड़ गया. तड़के विस्तर छोड़ श्रद्धालु स्नान आदि के बाद पवित्रता के साथ देवालयों में गए और गंध, अक्षत, पुष्प, धूप, दीप व नैवेद्य अर्पित कर मां भगवती की पूजन-अर्चन किए. इसको लेकर मंदिरों में सूर्योदय से पहले ही श्रद्धालु पहुंच गए और दर्शन-पूजन करने लगे. इसके चलते मंदिरों में लंबी कतारें लग गईं थी. स्नान के लिए गंगा घाटों पर उमड़ी भीड़ : वासंतिक नवरात्र के पहले दिन पावन स्नान को लेकर यहां के रामरेखाघाट समेत अन्य गंगा घाटों पर भीड़ उमड़ गयी. घाटों पर पहुंचकर श्रद्धालु गंगा में पावन डुबकी लगाए तथा पात्रों में जल ग्रहण कर मंदिरों में गए और आराध्य को जल अर्पण कर वैदिक विधि-विधान से पूजा किए. आचार्यों के मुताबिक गंगा स्नान के बाद पूजन-अर्चन का महत्व बढ़ जाता है. ऐसे में श्रद्धालु यहां के उतरायणी गंगा में स्नान करना अपना सौभाग्य मानते हैं.

नव संवत्सर के जश्न में डूबे जिलेवासी : चैत्र शुक्ल प्रतिपदा से नव संवत्सर 2082 का आगाज हो गया. हिन्दू मतावलंबियों के साथ ही अन्य समुदाय के लोग भी परंपरागत तरीके से नव संवत्सर मनाए और एक दूसरे को बधाई दिए. नव वर्ष को लेकर जिलेवासी काफी उत्साहित दिख रहे थे. वासंतिक नवरात्र के साथ ही संवत्सर का नाम भी बदल गया.

नव संवत्सर 2082 का नाम कालयुक्त है. इससे पूर्व 2081 संवत्सर का नाम पिंगल था.अब पूजन संकल्प आदि विधि में पिंगल नाम संवत्सर के स्थान पर कालयुक्त नाम संवत्सर का उच्चारण किया जाएगा. 30 मार्च से लेकर एक वर्ष तक काल युक्त संवत्सर रहेगा.

छह अप्रैल को मनेगी रामनवमी आचार्य श्रीकृष्णानंद जी पौराणिक ने बताया कि यह वासन्तिक नवरात्र व्रत आठ दिनों का है. क्योंकि पंचांग के मुताबिक पंचमी तिथि की हानि हो रही है. श्रीराम नवमी व्रत निर्विवाद रूप से 6 अप्रैल रविवार को मध्याह्न काल में मनाया जाएगा. उन्होंने बताया कि नवरात्र का व्रत 30 मार्च रविवार से प्रारम्भ होकर 6 अप्रैल रविवार तक रखा जाएगा. नवरात्र व्रत का पारण 7 अप्रैल दिन सोमवार को होगा. वहीं डुमरांव में चैत्र नवरात्र के पहले दिन शहर से लेकर प्रखंड के विभिन्न ग्रामीण इलाकों में मां शैलपुत्री की पूजा अर्चना की गयी. सुबह होते ही महिला श्रद्धालुओं ने मंदिरों में पहुंचकर देवी मां के गीत ””””निमिया के डार मईया”””” गा रही थी.जहां पुरा मंदिर परिसर देवी मां के गीत से गुंजमान हो रहा था. इस दौरान मंदिर परिसर में पहुंचे महिला-पुरूष श्रद्धालुओं ने बताया कि चैती नवरात्र में मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा अर्चना की जाती है. जिससे परिवार के दुख-कष्ट दूर होते हैं. इस अवसर पर भक्त पूरे नौ दिनों तक उपवास रख देवी मां की अराधना करते हैं. वही इस चैत नवरात्र के पावन अवसर पर डुमरांव नगर सहित प्रखंड के कोपवां भव्य काली मंदिर में श्रद्धालुओं की भीड़ मां काली के पूजा अर्चना के लिए दिन भर लगा रहा, जब कि इलाके के विभिन्न ग्रामीण क्षेत्रों के काली मंदिरों में भक्ति भाव के बीच श्रद्धालुओंं ने मां को मत्था टेक अपने परिवार के लिए सुखमय जीवन की कामना की. लोगों ने बताया कि चैत्र नवरात्र के पहले दिन सुबह 4 बजे से ही श्रद्धालु अपने घरों से आसपास के देवी मंदिरों पूजा अर्चना के लिए निकलना शुरू कर दिए थे. जहां पहले दिन से नवरात्र के इस पावन अवसर पर मां भगवती की पूजा की शुरुआत की. वहीं केसठ में मां शैलपुत्री की पूजा अर्चना के साथ वासंतिक नवरात्रि का रविवार को शुभारंभ हो गया. भारतीय नववर्ष के शुभारंभ के अवसर पर मंदिरों में प्रात: काल कलश स्थापना के साथ मां नव दुर्गा के प्रथम रूप शैल पुत्री की वैदिक मंत्रोच्चारण के साथ पूजा अर्चना हुई. प्रात:काल से ही विभिन्न देवी मंदिरों में भक्तों का सैलाब उमड़ पड़ा और मां दुर्गा के जयकारों से पुरा वातावरण गूंज उठा. प्रथम दिन माता के प्रथम रूप शैल पुत्री की पूजा अर्चना एवं भगवान गणेश के पूजन के साथ शुरू हुई. इससे पहले भक्तों ने मां दुर्गा के सुमिरन के साथ कलश स्थापना शुरू की. मां दुर्गा के आह्वान और वैदिक मंत्रोच्चारण के साथ घर में पुजा अर्चना की गयी. इसके बाद भक्तों ने मां दुर्गा का व्रत रखकर मां के दरबार में माथा टेका और चुनरी आदि प्रसाद मां के दरबार में चढ़ाया. इस दौरान मां दुर्गा के जयघोष से पुरा क्षेत्र गुंजायमान हो उठा.वही सोमवार को आदि शक्ति नव दुर्गा के दूसरे रूप ब्रह्मचारिणी की पूजा-अर्चना होगी. नवरात्र के शुरू होने के साथ ही नया बाजार स्थित मां भवानी मंदिर, काली मंदिर समेत दसियांव, रामपुर, कतिकनार, डिहरा के देवी मंदिरों में श्रद्धालुओं एवं भक्तों की भीड़ देखी गयी.

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