Buxar News : महिला सशक्तिकरण और आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने के लिए जिला प्रशासन की ओर से लगातार पहल की जा रही है. इसी कड़ी में महिलाओं को स्वरोजगार शुरू करने के लिए आर्थिक सहायता उपलब्ध करायी जा रही है. जिला प्रशासन से मिली जानकारी के अनुसार अप्रैल 2026 से अब तक दो चरणों में जिले की 22 महिलाओं को आर्थिक सहायता दी जा चुकी है. प्रत्येक महिला को स्वरोजगार शुरू करने के लिए 10 हजार रुपये की सहायता राशि उपलब्ध करायी गयी है.
छोटी शुरुआत से आत्मनिर्भर बनने की राह
इस पहल का उद्देश्य महिलाओं को उनकी रुचि, क्षमता और स्थानीय जरूरत के अनुसार स्वरोजगार शुरू करने के लिए प्रोत्साहित करना है. आर्थिक सहायता मिलने के बाद महिलाओं ने अपनी पसंद के काम का चयन कर आमदनी का जरिया तैयार करना शुरू किया है. प्रशासन की इस पहल से महिलाओं को घर की जिम्मेदारियों के साथ आर्थिक गतिविधियों से जुड़ने का अवसर मिल रहा है.
किराना दुकान खोलकर शुरू की कमाई
आर्थिक सहायता का लाभ मिलने के बाद कुछ महिलाओं ने छोटी किराना दुकान शुरू की है. इन दुकानों के माध्यम से महिलाएं अपने घर के आसपास ही व्यवसाय कर रही हैं. इससे उन्हें नियमित आमदनी का साधन मिलने के साथ परिवार की आर्थिक जरूरतों में सहयोग करने का अवसर मिल रहा है.
सिलाई मशीन बनी रोजगार का साधन
वहीं, कुछ महिलाओं ने सहायता राशि का इस्तेमाल सिलाई मशीन खरीदने में किया है. सिलाई का काम शुरू कर महिलाएं अपने घर से ही आमदनी अर्जित कर रही हैं. इससे उन्हें स्वरोजगार के लिए बाहर जाने की आवश्यकता नहीं पड़ रही है और घरेलू जिम्मेदारियों के साथ काम करने की सुविधा मिल रही है.
बकरी पालन से बढ़ रही आय
कई महिलाओं ने बकरी पालन को भी स्वरोजगार के रूप में अपनाया है. ग्रामीण क्षेत्रों में बकरी पालन को कम लागत में शुरू किए जाने वाले व्यवसाय के तौर पर देखा जाता है. महिलाओं को आर्थिक सहायता मिलने के बाद इस दिशा में आगे बढ़ने का अवसर मिला है. इससे भविष्य में उनकी आय बढ़ने की उम्मीद है.
आर्थिक मजबूती से बढ़ेगा आत्मविश्वास
जिला प्रशासन की इस पहल का उद्देश्य सिर्फ महिलाओं को आर्थिक सहायता देना नहीं, बल्कि उन्हें स्थायी रूप से आर्थिक रूप से सक्षम बनाना है. स्वरोजगार के माध्यम से महिलाएं परिवार की आय में योगदान देने के साथ अपने फैसले खुद लेने की दिशा में भी आगे बढ़ रही हैं. प्रशासन का मानना है कि महिलाओं की आर्थिक मजबूती से परिवार और बच्चों के जीवन स्तर में सुधार के साथ समाज के समग्र विकास को भी गति मिलेगी.
