Buxar News : ज्योति प्रकाश चौक के समीप स्थित नेहा नर्सिंग होम परिसर में गोस्वामी तुलसीदास की जयंती श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाई गई. कार्यक्रम की शुरुआत गोस्वामी तुलसीदास की प्रतिमा पर माल्यार्पण और पुष्प अर्पित कर की गई. इसके बाद साहित्यिक गोष्ठी का आयोजन हुआ.
तुलसी साहित्य पर हुई विस्तृत चर्चा
गोष्ठी के आयोजक नेहा नर्सिंग होम के संचालक डॉ. महेंद्र प्रसाद रहे. विशिष्ट अतिथि के रूप में प्रसिद्ध मानस प्रवचनकर्ता डॉ. राम नायक ओझा मौजूद रहे, जबकि कार्यक्रम का संचालन श्री राकेश प्रसाद वर्मा ने किया. इस दौरान डॉ. अरुण मोहन मारवी, डॉ. प्रकाश चंद चतुर्वेदी, वैरागी इंजीनियर रामाधार सिंह, प्रो. डॉ. नीलोत्पल नाथ पांडेय, रेणु कौशिक और निर्मल कुमार सिंह समेत कई प्रबुद्ध वक्ताओं ने अपने विचार रखे.
450 वर्ष बाद भी जनमानस में जीवंत है रामचरितमानस
वक्ताओं ने गोस्वामी तुलसीदास के जीवन, उनके साहित्य और रचनाओं पर विस्तार से चर्चा की. उन्होंने कहा कि तुलसीदास द्वारा अवधी भाषा में रचित ‘रामचरितमानस’ करीब 450 वर्ष पूर्व लिखा गया था, लेकिन आज भी यह जनमानस के हृदय में गहराई से बसा हुआ है. वक्ताओं ने बताया कि ‘रामचरितमानस’ की रचना में तुलसीदास को 2 वर्ष, 7 महीने और 26 दिन का समय लगा था.
नैतिक मूल्यों और सामाजिक समरसता का संदेश देता है तुलसी साहित्य
गोष्ठी में ‘रामचरितमानस’ के अलावा तुलसीदास की अन्य रचनाओं के सामाजिक और सांस्कृतिक महत्व पर भी चर्चा हुई. वक्ताओं ने कहा कि तुलसी का साहित्य आज भी समाज को नैतिक मूल्यों, मानवीय संवेदनाओं और सामाजिक समरसता का मार्ग दिखाता है.
साहित्य प्रेमियों और गणमान्य लोगों ने लिया हिस्सा
कार्यक्रम में बड़ी संख्या में साहित्य प्रेमी, चिकित्सक और गणमान्य लोग शामिल हुए. सभी ने तुलसीदास के साहित्य और उनके विचारों को वर्तमान समय में भी प्रासंगिक बताया.
