buxar news : टूटी सड़क व गंगाजल आपूर्ति का टूटता भरोसा ही पैगंबरपुर पंचायत की हकीकत

buxar news : करोड़ों रुपये खर्च कर बनाये गये वाटर ट्रीटमेंट प्लांट का नहीं हो रहा इस्तेमालपाइपलाइन बिछाने के लिए खोदी गयीं सड़कें आज तक नहीं हुईं मरम्मत

buxar news : डुमरांव. अनुमंडल क्षेत्र के पैगंबरपुर पंचायत में गंगाजल आपूर्ति योजना अब विकास की नहीं, बल्कि विडंबना की पहचान बनती जा रही है. करोड़ों की लागत से बनाए वाटर ट्रीटमेंट प्लांट अब शोभा की वस्तु बन कर रह गयी है. जिस योजना को ग्रामीणों के जीवन में शुद्ध पेयजल और स्वास्थ्य सुरक्षा का नया अध्याय खोलना था, वही आज सवालों के घेरे में है. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार द्वारा 14 फरवरी को केशोपुर वाटर ट्रीटमेंट प्लांट का बड़े तामझाम के साथ शुभारंभ किया गया. मंच से वादे हुए, तस्वीरें खिंची गयीं और भरोसा दिलाया गया कि जल्द ही पंचायत के सभी वार्डों में गंगाजल पहुंचेगा. लेकिन, लगभग एक साल बीत जाने के बाद भी स्थिति जस की तस बनी हुई है. बडकासिंहनपुरा विकास परिषद के अध्यक्ष हेमचंद्र ओझा ने बताया कि पैगंबरपुर पंचायत में कुल 13 वार्ड हैं, जिनमें से केवल तीन वार्डों में ही गंगाजल की आपूर्ति किसी तरह शुरू हो सकी है. वह भी आपूर्ति ऐसी कि दिन में एक बार, वह भी अनियमित. शेष 10 वार्ड आज भी उसी ””””शीघ्र”””” के भरोसे जी रहे हैं, जो सरकारी शब्दावली में न जाने कितने वर्षों का हो सकता है. विकास परिषद के उप सचिव दिलीप कुमार ओझा ने कहा कि हैरत की बात यह है कि मीडिया के माध्यम से कई बार इस समस्या को अधिकारियों तक पहुंचाया गया, लेकिन नतीजा सिफर ही रहा. विडंबना यहीं खत्म नहीं होती. गंगाजल के नाम पर पंचायत की गलियों को खोद डाला गया, पाइपलाइन बिछायी गयी और घर-घर कनेक्शन भी दे दिया गया. ग्रामीणों को भरोसा दिया गया कि जैसे ही जलापूर्ति शुरू होगी, सड़कें भी दुरुस्त कर दी जायेंगी. लेकिन जब पानी ही नहीं आया, तो सड़कें कैसे बने? नतीजा यह हुआ कि पिछले डेढ़ साल से ग्रामीण टूटी, उखड़ी और कीचड़ से भरी सड़कों पर चलने को मजबूर हैं. बरसात के मौसम में हालत और बदतर हो गयी. बच्चे गिरते-पड़ते स्कूल जाते हैं और बुजुर्ग हर कदम पर खतरे से जूझते हैं. सबसे बड़ी बात यह है कि गंगाजल योजना का मुख्य उद्देश्य आर्सेनिक युक्त जल से ग्रामीणों को मुक्ति दिलाना था. लेकिन जिन 10 वार्डों में आज तक पानी नहीं पहुंचा, वहां के लोग अब भी वही दूषित पानी पीने को विवश हैं. सवाल यह है कि क्या योजनाओं का उद्घाटन ही विकास मान लिया गया है? क्या जमीन पर काम पूरा करना अब प्राथमिकता नहीं रह गयी? ग्रामीणों की मांग साफ है कि पंचायत के शेष 10 वार्डों में शीघ्र गंगाजल आपूर्ति शुरू की जाये और जलापूर्ति के लिए खोदी गयीं सड़कों की तत्काल मरम्मत करायी जाये. वरना गंगाजल योजना इतिहास में एक और ””””घोषित लेकिन अधूरी”””” योजना के रूप में दर्ज हो जायेगी, और ग्रामीणों का भरोसा यूं ही टूटी सड़कों पर बिखरा रहेगा.

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Published by: Shailesh kumar

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