बक्सर. बक्सर विधान सभा के दजनो गाँव को जोडने वाला सड़क नगर से डुमरांव तक जाने के लिए राष्ट्रीय राजमार्ग-84 का वैकल्पिक मार्ग जासो-नदांव-जगदीशपुर सड़क जनप्रतिनिधियों तथा अधिकारियों की उदासीनता का शिकार है. यह सड़क धार्मिक दृष्टिकोण से देखा जाई तो पंचकोसी मेले को भी जोड़ती है.
ग्रामीण कार्य विभाग बक्सर प्रमंडल के अधीन सड़क की हालत ऐसी है कि पूरे मार्ग में गड्ढे ही गड्ढे नजर आते हैं. सड़क पर कई जगह वाहन तो दूर, पैदल चलना तक मुश्किल हो जाता है. जासो, नदांव, जगदीशपुर कुल्हड़िया होते हुए तकरीबन 20 किलोमीटर लंबी यह सड़क सीधे डुमरांव के साफाखाना रोड में निकलती है. जानकार बताते हैं कि पहले इस सड़क से होकर जाने में अधिकतम आधे घंटे का समय लगता था, लेकिन अब यह सफर दो घंटे का हो गया है. निर्माण के बाद से ही समय-समय पर मरम्मत, अनुरक्षण एवं देखरेख नहीं होने के कारण यह कई जगह टूट गयी है. हालात यह हो गये हैं कि बरसात के दिनों में कौन कहे आम दिनों में भी यहां जलजमाव का नजारा साफ तौर पर देखा जाता है. बताया जा रहा है कि यह जलजमाव घरों से निकलने वाले नालियों के पानी के कारण है. एक तो सड़क पर गड्ढे बने हुए हैं, ऊपर से नालियों के पानी भर जाने से गड्ढों की वास्तविक गहराई का अंदाजा नहीं चल पाता, जिससे बड़ी दुर्घटना होने की प्रबल आशंका बनी रहती है. वहीं, छोटी-मोटी दुर्घटनाएं तो अक्सर इस सड़क पर देखने को मिलती हैं. गुहार लगाने के बाद भी नहीं हालात सुधरे. इतनी जर्जर स्थिति होने के बाद भी विधानचुनाव में कोई मुद्दा नहीं बन पाया.दो विधानसभा क्षेत्रों को जोड़ती है यह सड़क
बक्सर और डुमरांव विधानसभा क्षेत्र के जोड़ने वाली यह सड़क के निर्माण के लिए स्थानीय लोगों ने जनप्रतिनिधियों से लेकर अधिकारियों तक के कई बार गुहार लगायी, लेकिन हालात में अब तक कोई विशेष सुधार नहीं हो सका है. बताया जा रहा है कि पिछले दिनों स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने गड्ढों में ईंट भरकर उसे दुरुस्त किया. यह कार्य इस सड़क की दुर्दशा को दूर करने के लिए नाकाफी है. यह हालत पिछले कई वर्षों से हैं. सांसद-विधायक से लेकर जिले के वरीय अधिकारियों तक इस समस्या को पहुंचाया गया, लेकिन अब तक कोई समाधान नहीं मिला. सोनू कुमार, जगदीशपुर गांव आम दिनों में तो किसी तरह लोग अपना आना-जाना कर लेते हैं.लेकिन बरसात के दिनों में हालत बद से बदतर हो जाती है. नेता केवल वोट मांगने आते हैं, लेकिन जनता की समस्या से कभी उन्हें कोई सरोकार नहीं रहता. पारस सिंह स्थानीय लोगों की शिकायतों के मद्देनजर स्थानीय जन प्रतिनिधियों ने सड़कों पर उभर आये गड्ढों में ईंट तथा मिट्टी भरवा कर उसे पाटने का काम तो किया, लेकिन यह समस्या का स्थायी समाधान नहीं बन सका. ऋषि कांत सिंह सड़क की बदहाली के कारण कई रिश्तेदारों तक ने उनके यहां आना-जाना कम कर दिया. यही नहीं शादी-विवाह के मामलों में लोग अभी इस मार्ग पर पड़ने वाले गांव में रिश्तेदारी नहीं जोड़ना चाहते. पंचकोशी परिक्रमा के दौरान देश-विदेश से साधु, संत, महात्माओं तथा श्रद्धालुओं का आना शिव प्रवेश सिंह के गांव स्थित नारद आश्रम पर होता है. उसी वक्त प्रशासन इस मार्ग की सुध लेती है. इसके अतिरिक्त कभी इस सड़क पर किसी का ध्यान नहीं होता है. मोहन जी दूबे, नदाव गांव दिन में तो किसी प्रकार लोग बच-बचाकर चल लेते हैं. लेकिन, रात के समय बड़ा हादसा होने की संभावना अक्सर बनी रहती हैं.
अवधेश यादव, कुल्हड़िया गांव सड़क बनने की बात संज्ञान में आयी थी, लेकिन अभी तक सड़क का निर्माण नहीं हो सका है. सड़क नहीं बनवा सकने वाले जनप्रतिनिधि अब किस मुंह से वोट मांगने आयेंगे. सड़क की खस्ताहाल से जिले के तमाम जनप्रतिनिधि व अधिकारी अवगत हैं. लेकिन अब तक इस सड़क के निर्माण में कोई पहल नहीं हुई है. पिछले दिनों लोगों को हो रही परेशानियों के मद्देनजर चंदा काटकर सड़क पर रोड़े फेंकवाये गये थे. लेकिन, उससे भी कुछ खास राहत नहीं मिली. मंटू लाल बबुआ ने बताया कि यह सड़क पंचकोसी मेला से भी जोडती है.लगातार 10 साल से विधायक, सांसद और जिला प्रशासन से गुहार लगाया जा रहा है, लेकिन किसी ने भी संज्ञान नहीं लिया गया. इसका जवाब अब विधानसभा चुनाव में दिया जायेगा. किसी प्रत्याशी ने इस सड़क को अपना चुनावी मुद्दा नहीं बनाया है. ऐसे में सोचने वाली बात यह है कि चुनाव में जब स्थानीय मुद्दा को शामिल नहीं किया गया, तो आखिरकार इन सभी का मुद्दा क्या है.
डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है
