Buxar News : सिद्धाश्रम की पावन भूमि बक्सर के रामरेखाघाट स्थित पौराणिक श्रीरामेश्वरनाथ मंदिर परिसर में इन दिनों भक्ति और आध्यात्म का माहौल बना हुआ है. जय भोलेनाथ ग्रुप एवं पंडा समाज के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित नौ दिवसीय श्रीराम कथा के आठवें दिन मंगलवार को श्रीराम-भरत मिलाप का मार्मिक प्रसंग सुनाया गया. प्रख्यात कथावाचक श्री प्रेमाचार्य पीतांबर जी महाराज के भावपूर्ण वर्णन से पंडाल में मौजूद श्रद्धालुओं की आंखें नम हो गयीं और पूरा परिसर ‘जय सिया राम’ के जयकारों से गूंज उठा.
राम के वनगमन की खबर सुन व्यथित हुए भरत
कथा व्यास ने बताया कि प्रभु श्रीराम के वनवास और महाराज दशरथ के देहावसान के बाद भरत ननिहाल से अयोध्या लौटे. वहां उन्हें माता कैकेयी के वचनों और श्रीराम के वनगमन की जानकारी मिली. इससे भरत ग्लानि और भ्रातृ प्रेम से व्यथित हो उठे. इसके बाद वे अयोध्यावासियों और गुरुजनों के साथ प्रभु श्रीराम को वापस लाने के लिए चित्रकूट की ओर चल पड़े.
चरणों में गिर पड़े भरत, राम ने लगाया गले
चित्रकूट पहुंचने के बाद भरत जी रोते हुए प्रभु श्रीराम के चरणों में गिर पड़े. प्रभु श्रीराम ने उन्हें उठाकर अपने गले से लगा लिया. इस मार्मिक प्रसंग का वर्णन सुनकर श्रद्धालु भाव-विभोर हो उठे. कथा के दौरान ‘राम भक्त ले चला राम की निशानी, शीश पर खड़ाऊं अंखियों में पानी...’ भजन की प्रस्तुति ने वातावरण को और भावुक बना दिया.
पिता के वचन को सर्वोच्च मानकर वनवास पर अडिग रहे राम
महाराज श्री ने बताया कि भरत जी ने प्रभु श्रीराम से अयोध्या लौटने का बार-बार आग्रह किया, लेकिन श्रीराम ने पिता महाराज दशरथ के वचन को सर्वोच्च मानते हुए वनवास पूरा करने का निर्णय नहीं बदला. भरत के निश्छल प्रेम और समर्पण से प्रसन्न होकर प्रभु श्रीराम ने उन्हें अपनी चरण पादुका सौंप दी.
कथा में पहुंचे गणमान्य और बड़ी संख्या में श्रद्धालु
भरत मिलाप के प्रसंग के दौरान पंडाल में बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे. कथा के बाद भक्तों ने जय सिया राम के जयकारे लगाए. मौके पर सुप्रसिद्ध चिकित्सक डॉ. श्रीनिवास उपाध्याय समेत अन्य गणमान्य लोग उपस्थित रहे.
