Buxar News: जिले में 9679 हेक्टेयर में डाला जायेगा धान का बीज

शारदीय खरीफ सीजन की शुरुआत के साथ ही जिले में धान की बुआई के लिए बीज डालने की तैयारियां जोर-शोर से चल रही हैं

बक्सर

. शारदीय खरीफ सीजन की शुरुआत के साथ ही जिले में धान की बुआई के लिए बीज डालने की तैयारियां जोर-शोर से चल रही हैं इस वर्ष कृषि विभाग ने जिले में 96790.32 हेक्टेयर क्षेत्र में धान की खेती का लक्ष्य तय किया है. इस लक्ष्य की पूर्ति के लिए विभाग ने 9679 हेक्टेयर भूमि में बीज डालने की योजना बनाई है, जिससे खेतों में समय पर रोपाई सुनिश्चित की जा सकें. कृषि विभाग ने किसानों को प्रोत्साहित करने और बुआई के लिए उच्च गुणवत्ता वाले बीज उपलब्ध कराने हेतु 655 क्विंटल धान बीज वितरण का लक्ष्य भी निर्धारित किया है.लेकिन जिले में अनुदानित दर पर मिलने वाले बीजों की आपूर्ति अभी तक नहीं हो सकी है, जिससे किसानों में चिंता की स्थिति उत्पन्न हो गई है. इस संबंध में जिला कृषि पदाधिकारी अविनाश शंकर राय ने बताया कि शुक्रवार शाम या शनिवार की सुबह तक जिले को धान का बीज उपलब्ध हो जायेगा. उन्होंने कहा कि जिले को बीज और कुछ पहले उपलब्ध हो जाना चाहिए ताकि समय से किसानों के बीच वितरण किया जा सकें. उन्होंने बताया कि दो जून से सरकार के द्वारा अनुदानित दर पर बीज वितरण शुरू कर दिया जाएगा. बीज वितरण में देरी, किसान हो रहे परेशानखरीफ मौसम में समय पर बुआई अत्यंत महत्वपूर्ण होती है.विशेषकर धान जैसी प्रमुख फसल के लिए बीज डालने से लेकर रोपाई तक की समय-सीमा बेहद अहम होती है.ऐसे में अगर अनुदानित दर पर बीज मिलने में देरी होती है, तो इसका सीधा असर फसल उत्पादन पर पड़ सकता है. जिले के किसान रमेश राय का कहना है कि उन्होंने पहले से ही अपने खेत तैयार कर लिए हैं और बीज डालने के लिए बीज की प्रतीक्षा कर रहे हैं.हर साल अनुदानित बीज का सहारा लेते हैं, लेकिन इस बार अभी तक कोई स्पष्टता नहीं है.बाजार से बीज खरीदना महंगा पड़ता है. कृषि विभाग के द्वारा अगर सही समय पर अनुदानित दर बीज उपलब्ध करा देता है तो किसानों को काफी सहायता मिलती. उर्वरक की मांग और आपूर्ति में भारी अंतरधान की खेती में उर्वरकों की खपत भी भारी मात्रा में होती है.कृषि विभाग के अनुसार, इस सीजन में जिले में कुल 42 हजार मीट्रिक टन एमटी खाद की आवश्यकता हो सकती है, जिसमें 35 हजार एमटी यूरिया और सात हजार एमटी डीएपी शामिल है.

विभागीय सूत्रों के अनुसार, इस समय जिले में केवल 1000 एमटी डीएपी और 10 एमटी यूरिया उपलब्ध है, जो आवश्यक मांग की तुलना में बहुत कम है. इस संबंध में जिला कृषि पदाधिकारी अविनाश शंकर राय ने बताया कि पूरे धान कि खेती में इतना 42 हजार मीट्रिक टन खफत होती है जो फैज वार खाद कि खपत होती है. अभी धान के बीचडा डालने व रोपनी के लिए खाद जिले में स्टॉक है किसान अपने क्षमता के अनुसार खाद का खरीदारी करके स्टॉक कर लें. ताकि समय आने पर खाद के लिए भाग दौड़ न करना पडे. वही किसानों को सलाह दिया कि खाद एक ही बार खरीद कर स्टॉक न करें. फ्रेज वार खाद की खरीदारी करें. ताकि अन्य किसानों को भी खाद कि समस्या से न झेलना पडे.

खाद आपूर्ति बनी बड़ी चुनौतीइस स्थिति को देखते हुए किसान आशंकित हैं कि यदि समय रहते उर्वरकों की आपूर्ति नहीं हुई तो बुआई के साथ-साथ उत्पादन पर भी गहरा असर पड़ सकता है.यूरिया, डीएपी जैसी उर्वरकों की समय पर और पर्याप्त उपलब्धता धान की फसल में पौधों की जड़ों की वृद्धि, पौष्टिकता और उपज को सीधे प्रभावित करती है. अविनाश शंकर राय ने बताया किखाद आपूर्ति को लेकर विभाग राज्य स्तर पर लगातार संपर्क में है.हमने यूरिया और डीएपी की मांग पहले ही भेज दी है.राज्य भंडारण केंद्र से सप्लाई की प्रक्रिया जारी है.फ्रेज वार खाद जिले को प्राप्त हो रहा है.

भंडारण और वितरण प्रणाली पर सवालखाद और बीज की आपूर्ति में लगातार देरी को लेकर कृषि विभाग की व्यवस्था पर भी सवाल उठ रहे हैं.किसानों का कहना है कि हर साल आपूर्ति में देरी होती है, और फिर अंतिम समय पर अचानक भीड़ लग जाती है, जिससे काला बाज़ारी, लाइन में खड़े रहना और झगड़े जैसी समस्याएँ सामने आती हैं. जो लगातार दो सालों से जिले में खाद कि समस्या लगातार बनी रहती है . जिसके वजह तय रेट से दुगना दामों पर डाई और यूरिया किसानों को खरीदना पड़ता है. जिले के किसानों को मानना है कि विभाग को मांग का पूर्व अनुमान लेकर सीजन शुरू होने से पहले ही बीज और खाद की उपलब्धता सुनिश्चित करनी चाहिए.इसके साथ ही, वितरण प्रक्रिया को डिजिटल ट्रैकिंग से पारदर्शी बनाकर किसानों को सही समय पर लाभ पहुंचाना चाहिए.

धान की खेती जिले की कृषि अर्थव्यवस्था की रीढ़ है.इस वर्ष के लिए निर्धारित 96 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में खेती का लक्ष्य तभी सफल हो सकेगा, जब बीज और उर्वरकों की समय पर व पर्याप्त आपूर्ति सुनिश्चित की जाए.

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