Buxar News : बक्सर जिले में धान रोपनी का समय अपने चरम पर है, लेकिन इसी सबसे अहम दौर में किसानों को बिजली संकट का सामना करना पड़ रहा है. कृषि फीडरों पर लगे 52 ट्रांसफार्मर जल चुके हैं और तय समय सीमा के 72 घंटे बीत जाने के बाद भी उन्हें बदला नहीं गया है. इससे सैकड़ों किसान सिंचाई के लिए परेशान हैं और उनकी फसल पर संकट गहराता जा रहा है.
मौसम की बेरुखी पहले से ही किसानों की चिंता बढ़ा रही थी, अब बिजली आपूर्ति बाधित होने से हालात और बिगड़ गए हैं. खेतों में पानी की जरूरत सबसे ज्यादा है, लेकिन ट्रांसफार्मर खराब होने के कारण ट्यूबवेल नहीं चल पा रहे हैं. ऐसे में किसान मजबूरी में निजी साधनों का सहारा लेने को विवश हैं, जिससे उनकी लागत भी बढ़ रही है.
कई गांवों में ठप पड़ी सिंचाई व्यवस्था
विभागीय जानकारी के अनुसार जिले के अलग-अलग कृषि फीडरों में करीब 52 ट्रांसफार्मर खराब पड़े हैं. इनमें मगरांव, महदह, बड़की बसौली, दलसागर, गिरिधर बरांव, पिपराडीह, निधुआ, उतरी, राजपुर, खीरी, चुवाड़, मसरिया, फाफादार, कनक नारायणपुर और सोनपा जैसे कई गांव शामिल हैं.
इन इलाकों में ट्रांसफार्मर खराब होने के कारण सिंचाई व्यवस्था पूरी तरह प्रभावित हो गई है. खेतों में पानी नहीं पहुंच पा रहा है, जिससे धान रोपनी का काम रुक-रुक कर हो रहा है. किसानों का कहना है कि अगर जल्द समाधान नहीं हुआ तो उत्पादन पर सीधा असर पड़ेगा.
मेंटेनेंस एजेंसियों पर लापरवाही का आरोप
राज्य सरकार ने किसानों को सस्ती दर पर बिजली उपलब्ध कराने के लिए अलग से कृषि फीडरों का निर्माण कराया था और इन पर 25 केवी क्षमता के ट्रांसफार्मर लगाए गए थे. इनके रखरखाव की जिम्मेदारी पांच वर्षों के लिए संबंधित एजेंसियों को सौंपी गई है.
जिले में एनसीसी, टेकोनो और मिश्री लाल नामक तीन एजेंसियां इस काम की जिम्मेदारी संभाल रही हैं. नियम के अनुसार खराब ट्रांसफार्मर को 72 घंटे के भीतर बदलना अनिवार्य है, लेकिन किसानों का आरोप है कि शिकायत के बावजूद एजेंसियां समय पर कार्रवाई नहीं कर रही हैं.
कई स्थानों पर 72 घंटे से ज्यादा समय गुजर जाने के बाद भी ट्रांसफार्मर नहीं बदले गए हैं, जिससे विभागीय व्यवस्था पर सवाल खड़े हो रहे हैं.
किसानों की बढ़ी चिंता, निजी साधनों पर निर्भरता
स्थानीय किसान धनंजय सिंह का कहना है कि धान रोपनी का यह सबसे महत्वपूर्ण समय होता है. अगर इस दौरान समय पर सिंचाई नहीं हो पाई, तो पूरी फसल प्रभावित हो सकती है. उन्होंने बताया कि कई किसान अब डीजल पंप या अन्य निजी साधनों से पानी देने को मजबूर हैं, जिससे खर्च बढ़ रहा है.
किसानों ने बिजली विभाग से मांग की है कि खराब ट्रांसफार्मरों को तुरंत बदला जाए और कृषि फीडरों पर निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित की जाए, ताकि फसल को नुकसान से बचाया जा सके.
एजेंसियों को विभाग की चेतावनी
इस पूरे मामले को लेकर बिजली विभाग भी सक्रिय हुआ है. कार्यपालक अभियंता सूर्य प्रकाश सिंह ने बताया कि खराब ट्रांसफार्मरों को निर्धारित समय सीमा में बदलने के लिए संबंधित एजेंसियों को पत्र जारी किया गया है.
उन्होंने साफ कहा कि अगर एजेंसियां समय पर ट्रांसफार्मर नहीं बदलती हैं, तो विभाग खुद यह काम करेगा. इसके बाद खर्च की राशि एजेंसियों के मेंटेनेंस बिल से काटकर समायोजित की जाएगी.
जिले में बढ़ते इस संकट के बीच अब सभी की नजर इस बात पर टिकी है कि कब तक ट्रांसफार्मर बदले जाते हैं और किसानों को राहत मिलती है. अगर जल्द समाधान नहीं हुआ, तो धान उत्पादन पर बड़ा असर पड़ सकता है और किसानों की परेशानी और बढ़ेगी.
