Buxar News : बक्सर जिला राजपुर प्रखंड की तियरा पंचायत स्थित प्राथमिक विद्यालय मनोहरपुर तक पहुंचने वाला एकमात्र रास्ता इन दिनों पूरी तरह जलमग्न है. मुख्य सड़क से विद्यालय तक जाने वाली पगडंडी पर करीब दो से ढाई फीट पानी जमा है. बरसात में यह रास्ता लगभग चार महीने तक जलजमाव की समस्या से जूझता है. ऐसे में मासूम बच्चे और शिक्षक जान जोखिम में डालकर स्कूल आने-जाने को मजबूर हैं. पानी में गिरने से बच्चों की ड्रेस गंदी होने के साथ बैग में रखी किताब-कॉपियां भीग जाती हैं. समस्या से परेशान कई छोटे बच्चों ने स्कूल जाना तक बंद कर दिया है.
दो से ढाई फीट पानी में स्कूल जाने की मजबूरी
विद्यालय परिसर से मुख्य सड़क तक पहुंचने के लिए यही एकमात्र रास्ता है. बारिश के बाद पगडंडी पूरी तरह डूब चुकी है और उस पर दो से ढाई फीट तक पानी जमा है. बच्चों को इसी दूषित पानी से होकर विद्यालय पहुंचना पड़ता है. गहराई का अंदाजा नहीं होने के कारण कई बच्चे रास्ते में संतुलन बिगड़ने से पानी में गिर जाते हैं.
पानी में गिरते ही भीग जाती हैं किताबें-कॉपियां
ग्रामीणों के अनुसार रास्ते से गुजरते समय बच्चों के पानी में गिरने की घटनाएं लगातार होती रहती हैं. इससे उनकी स्कूल ड्रेस खराब होने के साथ बैग में रखी किताबें और कॉपियां भीग जाती हैं. छोटे बच्चों के अभिभावक इस स्थिति को लेकर चिंतित हैं. कई बच्चों ने रास्ते की बदहाली के कारण स्कूल जाना बंद कर दिया है.
वर्षों पहले दान में मिली थी जमीन, फिर भी नहीं बना रास्ता
ग्रामीणों ने बताया कि वर्षों पहले विद्यालय भवन के निर्माण के लिए गांव के महेंद्र चौबे की नानी ने जमीन दान में दी थी. विद्यालय भवन तो बन गया, लेकिन मुख्य सड़क से विद्यालय तक पहुंचने के लिए आज तक पक्के रास्ते का निर्माण नहीं हो सका. बारिश के मौसम में यही समस्या बच्चों और शिक्षकों के लिए बड़ी परेशानी बन जाती है.
निजी जमीन का पेच, कुछ भू-स्वामी रास्ते के लिए तैयार
ग्रामीणों का कहना है कि विद्यालय तक जाने वाला रास्ता निजी जमीन से होकर गुजरता है. हालांकि वर्षों से ग्रामीण इस रास्ते का इस्तेमाल करते आ रहे हैं. कुछ भू-स्वामी सड़क निर्माण के लिए तैयार भी हैं, लेकिन कुछ लोगों के विरोध के कारण पक्का रास्ता नहीं बन पा रहा है. ग्रामीणों ने बताया कि विद्यालय शिक्षा समिति और प्रधानाध्यापक की ओर से कई बार सड़क निर्माण की मांग की गयी है.
ग्रामीणों ने जनप्रतिनिधियों पर लगाया उदासीनता का आरोप
गांव के सनोज राम, राम गोपाल राम, भरत राम, शिवमूरत राम और दयाशंकर कमकर समेत अन्य ग्रामीणों का कहना है कि रास्ते की समस्या लंबे समय से बनी हुई है. इसके बावजूद जनप्रतिनिधियों और स्थानीय प्रशासन की ओर से समय रहते कोई प्रभावी पहल नहीं की गयी. ग्रामीणों ने प्रशासन से निजी जमीन से जुड़े विवाद का समाधान कर विद्यालय तक पक्के रास्ते का निर्माण कराने की मांग की है.
मुखिया बोलीं - विवाद के कारण रुका काम
तियरा ग्राम पंचायत की मुखिया उषा देवी ने बताया कि रास्ता निर्माण के लिए काम शुरू कराया गया था, लेकिन गांव के ही कुछ लोगों ने विवाद कर दिया, जिसके कारण काम रोकना पड़ा. मामला निजी जमीन से जुड़ा होने के कारण अंचलाधिकारी और वरीय अधिकारियों को लिखित आवेदन दिया गया है. अब तक प्रशासनिक स्तर पर इसका कोई समाधान नहीं निकल सका है. फिलहाल पगडंडी जलमग्न है और रास्ते पर दो से ढाई फीट पानी जमा है.
