Buxar News (सुजीत कुमार ओझा) : बिहार में शराबबंदी कानून लागू होने के बावजूद शराब तस्करों के हौसले किस कदर बुलंद हैं, इसका ताजा और सनसनीखेज उदाहरण बुधवार को डुमरांव के पास देखने को मिला. लोकमान्य तिलक-भागलपुर एक्सप्रेस में शराब की बड़ी खेप लेकर जा रहे तस्करों ने न केवल मद्य निषेध विभाग की टीम को खुली चुनौती दी, बल्कि उनके साथ जमकर हाथापाई करते हुए मौके से फरार भी हो गए. इस घटना ने एक बार फिर बक्सर से डुमरांव के बीच सक्रिय शराब माफियाओं के मजबूत नेटवर्क की पोल खोल दी है.
जानकारी के अनुसार, लोकमान्य तिलक-भागलपुर एक्सप्रेस (12336 डाउन) में भारी मात्रा में शराब की खेप ले जाए जाने की गुप्त सूचना मिलने पर मद्य निषेध विभाग की टीम बक्सर स्टेशन से ही ट्रेन में सवार हुई थी. टीम ने सफर के दौरान संदिग्ध यात्रियों पर पैनी नजर रखी और डिब्बों में सघन तलाशी अभियान शुरू किया. लेकिन, तस्करों को जैसे ही भनक लगी कि उत्पाद विभाग की टीम ट्रेन में मौजूद है, उन्होंने बच निकलने की योजना बना ली.
कुशलपुर-हरनाहा हॉल्ट के पास चेन पुलिंग कर रोकी ट्रेन
बताया जाता है कि ट्रेन जब डुमरांव के समीप कुशलपुर-हरनाहा हॉल्ट के पास पहुंची, तभी तस्करों ने अचानक चेन पुलिंग कर ट्रेन को रोक दिया. ट्रेन के रुकते ही दर्जनों की संख्या में मौजूद तस्कर तेजी से बोगियों से नीचे उतरकर भागने लगे. मद्य निषेध विभाग की टीम ने मुस्तैदी दिखाते हुए उन्हें खदेड़कर पीछा करने की कोशिश की, लेकिन तस्करों की संख्या अधिक होने के कारण हालात बेकाबू हो गए.
इस दौरान तस्करों और मद्य निषेध की टीम के बीच जमकर हाथापाई हुई, जिससे कुछ देर के लिए रेलवे ट्रैक के आस-पास अफरा-तफरी मच गई. हैरानी की बात यह रही कि विभाग की इस कार्रवाई के बावजूद शातिर तस्कर पूरी खेप लेकर भागने में सफल रहे.
सोशल मीडिया पर उड़ी फायरिंग की अफवाह, उत्पाद अधीक्षक ने किया खारिज
इस हाई-वोल्टेज ड्रामे के बाद आसपास के इलाके और सोशल मीडिया पर गोलीबारी और मुठभेड़ की अफवाहें तेजी से फैलने लगीं. हालांकि, उत्पाद अधीक्षक अशरफ जमाल ने इन खबरों को पूरी तरह से खारिज करते हुए साफ कहा कि घटना में किसी भी प्रकार की फायरिंग नहीं हुई है. उन्होंने बताया कि केवल हाथापाई की बात सामने आई है और फरार तस्करों की पहचान कर उनकी गिरफ्तारी के लिए विशेष टीमें गठित कर छापेमारी की जा रही है. इस घटना को लेकर जीआरपी थाना बक्सर में प्राथमिकी दर्ज करा दी गई है.
5 महीने में दूसरी बार हुई ऐसी वारदात, सेफ कॉरिडोर बना रेल मार्ग
इस पूरी घटना के बाद अब सुरक्षा व्यवस्था पर बड़े सवाल खड़े हो रहे हैं कि आखिर बार-बार एक ही इलाके में शराब तस्कर इतने संगठित तरीके से वारदातों को कैसे अंजाम दे रहे हैं? मालूम हो कि करीब पांच महीने पहले भी ठीक इसी स्थान पर तस्करों ने उत्पाद विभाग की टीम पर हमला किया था और शराब लेकर फरार होने में सफलता पाई थी.
अब दूसरी बार हुई इस समान घटना ने यह साबित कर दिया है कि बक्सर और डुमरांव के बीच शराब माफियाओं का नेटवर्क बेहद मजबूत है. स्थानीय लोगों का कहना है कि यह रेल मार्ग अब शराब तस्करों के लिए ‘सेफ कॉरिडोर’ बनता जा रहा है. सवाल यह भी उठ रहा है कि जब एक ही जगह पर लगातार ऐसी घटनाएं हो रही हैं, तो पुलिस और मद्य निषेध विभाग की रणनीति में चूक कहां रह जा रही है?
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