Buxar News: सोन नहर के भूमि से छह माह पहले हटाया गया था अतिक्रमण, भू-माफियाओं ने फिर की कब्जा

सोन नहर की भूमि पर भू- माफियाओं के साथ कई सरकारी महकमों का भी कब्जा वर्षों से बरकरार है

बक्सर

. सोन नहर की भूमि पर भू- माफियाओं के साथ कई सरकारी महकमों का भी कब्जा वर्षों से बरकरार है. अतिक्रमणकारियों की एक लंबी फेहरिश्त है. वैसे लोगों से अवैध कब्जा हटाने के लिए सोन नहर विभाग की ओर से जिलाधिकारी से लेकर सीओ कार्यालय से लगातार पत्राचार भी किया गया. पत्राचार के आलोक में पूर्व में सदर एसडीओ रहे धीरेंद्र मिश्रा के नेतृत्व में दिसम्बर 2024 में नाथ मंदिर से लेकर सिंडिकेट तक 243 अतिक्रमणकारियों में से 80 अतिक्रमणकारियों का कब्जा हटाया भी गया. मगर छह माह पहले हटाए गए अवैध कब्जा वाले जगहों पर फिर कब्जा कर लिया गया है. हां यह जरुर हुआ है कि पहले जहां कुल अतिक्रमणकारियों की संख्या 143 थी, अब वह बढ़कर 246 हो गया है. इन सभी अतिक्रमण करने वाले लोगों पर बिहार लोक भूमि अधिनियम 1956 के तहत सरकारी भूमि पर अतिक्रमण हटाने का पावर अंचल अधिकारी को है. जबकि लोक भूमि अतिक्रमण अधिनियम 1958 धारा 3 के तहत किसी भी सरकारी भूमि पर अतिक्रमण होता तो संबंधित विभाग को प्राथमिकी दर्ज कराते हुए एफआईआर नंबर अंचल अधिकारी को देना होता है. लेकिन सोन नहर के जेई जितेन्द्र कुमार का कहना है कि अतिक्रमणकारियों पर प्राथमिकी दर्ज करने के लिए मैं नगर थाना गया तो नगर थाना प्रभारी घंटों बैठाकर प्राथमिकी दर्ज नहीं की. इसके बाद सोन नहर विभाग के जेई द्वारा पोस्ट ऑफिस के माध्यम से संबंधित अतिक्रमण करने वाले लोगों पर प्राथमिकी दर्ज करने के लिए संबंधित थाना को सूची भेज दी गई है. उनका कहना है कि यदि अगर नगर थाना के द्वारा प्राथमिकी दर्ज करते हुए एफआईआर नंबर उपलब्ध करा दिया गया होता तो पुनः अतिक्रमण नहीं होता.सोन नहर की भूमि पर अवैध कब्जा सिर्फ एक विभागीय मुद्दा नहीं, बल्कि यह प्रशासन की साख और व्यवस्था की परीक्षा भी है. अगर भू-माफिया एक बार हटाने के बाद फिर से कब्जा कर ले रहे हैं, तो यह प्रशासनिक ढीलाई और कार्रवाई के अभाव को दर्शाता है.कानून की मौजूदगी के बावजूद अगर उसे लागू नहीं किया जा रहा है, तो यह भी एक तरह की विफलता है.जरूरी है कि अब सिर्फ दिखावटी कार्रवाई न होकर कठोर और परिणामकारी कदम उठाएं जाएं, ताकि सोन नहर की जमीन को अतिक्रमण से स्थायी रूप से मुक्त कराया जा सकें.

छह महीने पहले चलाया गया था अतिक्रमण हटाने का अभियानसोन नहर विभाग की भूमि पर अवैध कब्जे की समस्या कोई नई नहीं है. विभाग के अनुसार, वर्षों से भू-माफिया इस सरकारी भूमि को अपना निजी जमीन मानकर उस पर निर्माण कार्य कर रहे हैं.यही नहीं, कई सरकारी महकमें भी इस जमीन पर अनधिकृत रूप से अपना कब्जा जमाए हुए हैं. कई बार पत्राचार और मांग के बाद दिसंबर 2024 में तत्कालीन एसडीओ धीरेंद्र मिश्रा के नेतृत्व में नाथ मंदिर से लेकर सिंडिकेट इलाके तक बड़े पैमाने पर अतिक्रमण हटाओ अभियान चलाया गया था.इस अभियान में कुल 243 चिन्हित अतिक्रमण में से 80 अतिक्रमणकारियों को हटाया गया था. मगर एक बार फिर सोन नहर की जमीन पर अवैध कब्जा कर दुकानें चलायी जा रही हैं.

प्रशासनिक लापरवाही बनी पुनः अतिक्रमण का कारण

साफ तौर पर देखा जाए तो सोन नहर की भूमि पर पुनः अतिक्रमण के पीछे प्रशासनिक उदासीनता एक बड़ा कारण है.विभागीय प्रयासों के बावजूद थाना स्तर पर एफआईआर दर्ज नहीं होना न केवल कानून की अवहेलना है, बल्कि इससे भू-माफियाओं को भी प्रोत्साहन मिल रहा है. जब तक विधिवत कानूनी प्रक्रिया नहीं अपनाई जाएगी, तब तक अतिक्रमण को पूरी तरह से रोका नहीं जा सकता.

बोले अधिकारीजहां – जहां पर विभाग के जमीन पर अतिक्रमण है. संबंधित जेई को निर्देश दिया गया है कि प्राथमिकी दर्ज कराते हुए एफआइआर नंबर विभाग को प्राथमिक संख्या उपलब्ध कराएं. बहुत जल्द ही अतिक्रमण करने वालों पर फिर कारवाई किया जाएगा.धर्मेंद्र कुमारकार्यपालक अभियंता सोन नहर बक्सर

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