Buxar baba kancheshwar nath dham: डुमरांव से करीब 14 किलोमीटर दूर कोरानसराय मुख्य चौक होते हुए कचैनिया गांव के विनोबा वन में स्थित बाबा कंचनेश्वर नाथ धाम सावन माह में श्रद्धालुओं की अटूट आस्था का केंद्र बन जाता है. श्रावण मास की प्रत्येक सोमवारी को यहां अलग-अलग क्षेत्रों से हजारों श्रद्धालु भगवान शिव का जलाभिषेक और दर्शन करने पहुंचते हैं.
प्राचीन मंदिर से जुड़ी हैं कई धार्मिक मान्यताएं
स्थानीय लोगों पूर्णानंद मिश्र, धीरज पांडेय और सौरभ पांडेय उर्फ छोटक के अनुसार यह मंदिर अत्यंत प्राचीन है. मान्यता है कि जो श्रद्धालु सच्चे मन से बाबा कंचनेश्वर नाथ के दरबार में हाजिरी लगाते हैं, उनकी मनोकामनाएं पूरी होती हैं. प्रत्येक सावन में श्रद्धालु विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर अपनी इच्छाओं की पूर्ति की कामना करते हैं.
समाजसेवी धर्मेंद्र पांडेय ने बताया कि वर्षों पहले ग्रामीणों के सहयोग से मंदिर का जीर्णोद्धार कराया गया था. स्थानीय मान्यता के अनुसार इस स्थान पर भगवान शिव स्वयं प्रकट हुए थे. यहां भखौटी करने वाले भक्तों पर बाबा विशेष कृपा बरसाते हैं.
वाणासुर से भी जुड़ी है मंदिर की मान्यता
ग्रामीणों के अनुसार लोक मान्यता है कि प्राचीन काल में वाणासुर नामक राक्षस भी इस स्थान पर भगवान शिव को जल अर्पित करने आता था. वहीं आथर गांव के पुजारी स्वर्गीय दिनेश पाठक वर्षों तक यहां नियमित पूजा-पाठ करते रहे, जिससे इस मंदिर की धार्मिक महत्ता और अधिक बढ़ी.
श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए बना सामुदायिक भवन
दूर-दराज से आने वाले कांवरियों और श्रद्धालुओं की सुविधा को देखते हुए मंदिर परिसर में ग्रामीणों की मांग पर सामुदायिक भवन का निर्माण कराया गया है. लाखों रुपये की लागत से बने इस भवन में पेयजल और शौचालय की व्यवस्था उपलब्ध है, जिससे विशेषकर महिला श्रद्धालुओं को सुविधा मिलती है.
पर्यावरण संरक्षण का भी दिया जाता है संदेश
विनोबा वन स्थित मंदिर परिसर में सामाजिक कार्यकर्ताओं की ओर से समय-समय पर पौधारोपण अभियान चलाया जाता है. यहां आने वाले श्रद्धालुओं को भी पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक करते हुए पौधे लगाने के लिए प्रेरित किया जाता है.
100 एकड़ में फैला विशाल बरगद आकर्षण का केंद्र
मंदिर के समीप करीब 100 एकड़ में फैले विनोबा वन में स्थित विशाल बरगद का वृक्ष श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र है. इस वृक्ष की जटाएं लगभग 10 स्थानों पर जमीन में समाकर विशाल रूप ले चुकी हैं. वर्षों पुराना यह बरगद प्राकृतिक सौंदर्य और धार्मिक आस्था का अद्भुत संगम प्रस्तुत करता है, जिसे देखने के लिए बड़ी संख्या में लोग यहां पहुंचते हैं.
