Buxar News : डुमरांव प्रखंड के कचैनिया गांव में किसानों की परेशानी लगातार बढ़ती जा रही है. धान की खेती के इस महत्वपूर्ण मौसम में भी सैकड़ों किसान पानी के लिए जूझ रहे हैं. गांव से होकर गुजरने वाली रामपुर-आथर रजवाहा वर्षों से सूखी पड़ी है, जिससे सिंचाई की पूरी व्यवस्था ठप हो चुकी है. मजबूरी में किसान निजी ट्यूबवेल और बारिश के भरोसे खेती करने को विवश हैं.
वर्षों से सूखी पड़ी है रजवाहा
स्थानीय किसानों का कहना है कि रामपुर-आथर रजवाहा की हालत बेहद खराब हो चुकी है. समाजसेवी धर्मेंद्र पांडेय ने बताया कि बचपन से लेकर आज तक उन्होंने इस नहर में कभी पानी बहते नहीं देखा. रजवाहा में अब घास और कंजास उग आए हैं, जिससे यह पूरी तरह बेकार हो गई है.
किसानों का आरोप है कि नहर विभाग इस ओर बिल्कुल ध्यान नहीं दे रहा है. समय-समय पर सफाई और मरम्मत नहीं होने के कारण नहर अपनी उपयोगिता खो चुकी है.
ट्यूबवेल और बारिश पर निर्भर किसान
गांव के किसान छोटक पांडेय, सौरभ पांडेय, रजिंद्र पांडेय, नाटूर पांडेय, मुन्ना पांडेय, सुखारी पांडेय, अयोध्या गोंड और श्रीराम गोंड ने बताया कि हर साल पानी के अभाव में उन्हें भारी परेशानी झेलनी पड़ती है. धान की फसल के लिए समय पर पानी नहीं मिलने से उत्पादन पर भी असर पड़ता है.
किसानों ने बताया कि कुछ दिन पहले हुई बारिश से थोड़ी राहत जरूर मिली थी, लेकिन बिजली की अनियमितता के कारण ट्यूबवेल भी ठीक से नहीं चल पाते. ऐसे में सिंचाई की समस्या और गंभीर हो जाती है.
विभाग की अनदेखी से बढ़ी नाराजगी
ग्रामीणों का कहना है कि रजवाहा अब सिर्फ दिखावे की चीज बनकर रह गई है. इसकी सफाई और पानी की आपूर्ति को लेकर कोई ठोस कदम नहीं उठाया जा रहा है. हर साल यही स्थिति बनी रहती है, जिससे किसानों की उम्मीदें टूटती जा रही हैं.
किसानों ने की जल्द कार्रवाई की मांग
कचैनिया गांव के किसानों ने प्रशासन और नहर विभाग से मांग की है कि रामपुर-आथर रजवाहा की जल्द से जल्द सफाई कराई जाए और इसमें पानी की नियमित आपूर्ति सुनिश्चित की जाए. उनका कहना है कि अगर समय रहते इस समस्या का समाधान नहीं किया गया, तो खेती पर संकट और गहरा जाएगा.
किसानों का साफ कहना है कि अगर नहर में पानी उपलब्ध हो जाए, तो न केवल कचैनिया बल्कि आसपास के कई गांवों के किसानों को राहत मिलेगी और खेती भी बेहतर हो सकेगी.
