जिले में 581 पंप ऑपरेटर का मानदेय लगभग एक साल से है बकाया

जिले के ग्रामीण क्षेत्रों के 927 वार्ड में 581 पानी टंकी से जलापूर्ति पीएचइडी विभाग की ओर से किया जाता है.

बक्सर. जिले के ग्रामीण क्षेत्रों के 927 वार्ड में 581 पानी टंकी से जलापूर्ति पीएचइडी विभाग की ओर से किया जाता है. लेकिन 581 टंकी को समय से चलाने के लिए अनुरक्षक यानि ऑपरेटर की नियुक्ति की गयी है. मगर दशहरा और छठ पर्व में भी संवेदकों की कथित मनमानी की वजह से उन्हें मानदेय नहीं मिल पाया.जब इन सभी योजनाओं को चलाने के लिए पीएचइडी विभाग ने टेंडर निकालकर मेंटनेंस सहित अनुरक्षक का मानदेय भी शामिल किया है. 927 वार्डों में जलापूर्ति, पर कर्मी बिना मानदेय के काम कर रहे विभागीय जानकारी के अनुसार, जिले के ग्रामीण क्षेत्रों के कुल 927 वार्डों में पानी की आपूर्ति 581 पानी टंकी के माध्यम से की जा रही है. हर टंकी पर एक पंप ऑपरेटर अनुरक्षक को नियुक्त किया गया है, जो प्रतिदिन सुबह और शाम गांवों में स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराने के लिए पंप चलाते हैं, पानी टंकी की देखरेख करते हैं और मोटर के रखरखाव की जिम्मेदारी निभाते हैं. हालांकि, इन कर्मियों को पिछले लगभग 10 से 12 महीनों से मानदेय का भुगतान नहीं किया गया है. बावजूद इसके अधिकांश ऑपरेटर बिना वेतन के ही अपनी ड्यूटी निभा रहे हैं, ताकि गांवों में जलापूर्ति बाधित न हो. संवेदक की मनमानी से बिगड़ा हाल पीएचईडी विभाग ने इन योजनाओं के संचालन के लिए संवेदक को अधिकृत किया है, जिसके माध्यम से पंप ऑपरेटरों का चयन और भुगतान किया जाता है. परंतु उमरपुर पंचायत के रामपुर पंप के ऑपरेटर पामुल मिश्रा का कहना है कि संवेदक अपनी मनमानी कर रहा है. कई स्थानों पर कहा जा रहा है कि विभागीय फंड जारी होने के बावजूद संवेदक भुगतान नहीं कर रहा है. ऑपरेटरों का कहना है कि संवेदक हर महीने कोई-न-कोई तकनीकी बहाना बनाकर भुगतान टाल देता है कभी वेरिफिकेशन नहीं हुआ, तो कभी फंड नहीं आया. हमलोग काम बंद करें तो गांव में पानी ठप हो जायेगा. हम हर दिन हम लोग सुबह 6 बजे पानी टंकी पर पहुंच जाते हैं ताकि लोग नल से पानी भर सकें. पर एक साल से एक पैसा नहीं मिला. त्योहारों में बच्चों को कपड़ा भी नहीं दिला पाये. अगर काम छोड़ दें, तो पूरा वार्ड प्यासा हो जायेगा. दशहरा, दीपावली और छठ भी सूने बीते हर साल दीपावली और छठ पर्व पर इन ऑपरेटरों को थोड़ी बहुत अतिरिक्त राशि या समय पर भुगतान मिल जाया करता था, ताकि वे त्योहार मना सकें. लेकिन इस बार हालात इतने खराब हैं कि कई ऑपरेटरों ने त्योहार कर्ज लेकर मनाए, तो कई ने चुपचाप बिना खर्च किए दिन गुजार दिये. ग्रामीण इलाकों के जल योजनाओं से जुड़े कर्मियों के लिए मानदेय सपना बन गया है. टेंडर में रखी गई थी मानदेय की व्यवस्था विभागीय सूत्रों के अनुसार, पीएचईडी विभाग द्वारा जिन एजेंसियों को जलमीनार संचालन का जिम्मा दिया गया था, उनके टेंडर शर्तों में ही पंप ऑपरेटरों का मानदेय शामिल किया गया था. अर्थात ठेकेदार को नियमित रूप से मेंटेनेंस, बिजली बिल और ऑपरेटर का मानदेय देना था, लेकिन असल में संवेदक ने इस शर्त को गंभीरता से नहीं लिया. विभागीय अधिकारियों ने भी अब तक कोई सख्त कार्रवाई नहीं की, जिससे ठेकेदारों को मनमानी करने का मौका मिला. आर्थिक तंगी से बढ़ रही परेशानी मानदेय नहीं मिलने से कई पंप ऑपरेटरों के घर का खर्च चलाना मुश्किल हो गया है. कुछ ने उधारी लेकर बच्चों की फीस भरी, तो कुछ ने बकाया किराया या बिजली बिल का भुगतान नहीं कर पाये. कई परिवारों की महिलाओं ने बताया कि त्योहार पर बर्तन तक गिरवी रखने पड़े. हमारे पति रोज सुबह टंकी चलाते हैं, पर घर में चूल्हा चलाना मुश्किल हो गया. मानदेय के साथ-साथ कई टंकियों का बिजली बिल भी महीनों से बकाया है. ऑपरेटरों के अनुसार, कई बार बिजली विभाग ने नोटिस भी भेजा, लेकिन भुगतान नहीं होने से जलापूर्ति बाधित होने का खतरा बना हुआ है. पीएचइडी के फील्ड कर्मियों का कहना है कि यदि विभाग और संवेदक के बीच समन्वय नहीं हुआ, तो ग्रामीण इलाकों में जलापूर्ति व्यवस्था ठप पड़ सकती है. क्या कहते हैं अधिकारी अभी तक कोई ऐसा लिखित आवेदन प्राप्त नहीं हुआ है. अगर पंप ऑपरेट से आवेदन प्राप्त होगा, तो संबंधित संवेदक से विभागीय कार्रवाई किया जायेगा. राहुल कुमार, कार्यपालक अभियंता, पीएचइडी किस प्रखंड में कितने ऑपरेटर और कितने हैं वार्ड प्रखंड वार्ड ऑपरेटर बक्सर 127 91 ब्रहमपुर 176 167 सिमरी 268 95 चक्की 50 55 चौगाई 25 12 चौसा 63 26 डुमरांव 117 59 इटाढ़ी 39 33 केसठ 14 10 नावानगर 25 13 राजपुर 23 20

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Published by: Amlesh prasad

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