Buxar Kal Ka Mausam : कृषि विज्ञान केंद्र बक्सर और भारतीय मौसम विज्ञान विभाग के संयुक्त पूर्वानुमान के अनुसार जिले में 2 से 6 सितंबर तक बारिश का दौर जारी रहने की संभावना है. इस दौरान 2 सितंबर को सबसे अधिक 65 मिमी बारिश होने का अनुमान है. लगातार बारिश को देखते हुए कृषि विज्ञान केंद्र ने किसानों को फसलों की देखभाल और कीट प्रबंधन को लेकर विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी है.
2 सितंबर को सबसे अधिक बारिश की संभावना
मौसम पूर्वानुमान के अनुसार 2 सितंबर को 65 मिमी, 3 सितंबर को 12 मिमी, 4 सितंबर को 12 मिमी, 5 सितंबर को 8 मिमी और 6 सितंबर को भी 8 मिमी बारिश होने का अनुमान है. इस दौरान हवा की गति 10 से 15 किलोमीटर प्रति घंटे के आसपास रहने की संभावना जताई गयी है. सबसे अधिक हवा की गति 2 और 3 सितंबर को 15 किलोमीटर प्रति घंटा रहने का अनुमान है.
| तारीख | अनुमानित बारिश | हवा की गति |
| 2 सितंबर | 65 मिमी | 15 किमी/घंटा |
| 3 सितंबर | 12 मिमी | 15 किमी/घंटा |
| 4 सितंबर | 12 मिमी | 10 किमी/घंटा |
| 5 सितंबर | 8 मिमी | 10 किमी/घंटा |
| 6 सितंबर | 8 मिमी | — |
धान की फसल में निराई-गुड़ाई के बाद डालें नाइट्रोजन
कृषि वैज्ञानिक डॉ. देवकरण ने बताया कि बारिश की संभावना को देखते हुए किसानों को धान की फसल पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है. उन्होंने किसानों को समय पर निराई-गुड़ाई करने की सलाह दी है. इसके बाद धान की फसल में 20 से 30 किलोग्राम नाइट्रोजन प्रति हेक्टेयर की दर से डालने की सलाह दी गयी है, ताकि पौधों का विकास बेहतर तरीके से हो सके.
मक्का में तना छेदक कीट पर रखें नजर
कृषि वैज्ञानिक ने मक्का की फसल में तना छेदक कीट के प्रकोप की नियमित निगरानी करने की भी सलाह दी है. उन्होंने बताया कि इस कीट के प्रकोप की स्थिति में पौधे की बीच वाली पत्ती सूखकर मुरझाने लगती है. ऐसी पत्ती को खींचने पर वह आसानी से निकल आती है. किसानों को ऐसे लक्षण दिखाई देने पर तत्काल आवश्यक कीट प्रबंधन उपाय करने की सलाह दी गयी है.
बारिश के बीच फसल प्रबंधन जरूरी
कृषि विज्ञान केंद्र की ओर से किसानों से मौसम के पूर्वानुमान को ध्यान में रखते हुए कृषि कार्य करने की अपील की गयी है. लगातार बारिश की स्थिति में खेतों में जलजमाव पर भी नजर रखने की जरूरत है. कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार समय पर फसल की निगरानी और आवश्यक प्रबंधन करने से बारिश के दौरान होने वाले नुकसान को कम किया जा सकता है.
