बक्सर के डुमरांव अस्पताल में महिलाओं को बांटी गई एक्सपायरी सामान, जांच के आदेश

Buxar News: डुमरांव अनुमंडलीय अस्पताल में प्रसूताओं को वितरित की गई जच्चा-बच्चा किट में एक्सपायरी और नियर एक्सपायरी खाद्य सामग्री मिलने का मामला सामने आया है. 141 में से 91 किट पहले ही बांटी जा चुकी थीं. मामले की जांच के आदेश दिए गए हैं.

Buxar News (डुमरांव से सुजीत कुमार ओझा की रिपोर्ट):
डुमरांव अनुमंडलीय अस्पताल एक बार फिर गंभीर लापरवाही के आरोपों में घिर गया है. इस बार मामला नवप्रसूता महिलाओं को वितरित किए जाने वाले जच्चा-बच्चा किट से जुड़ा है. अस्पताल में प्रसव के बाद महिलाओं को दी गई किटों में एक्सपायरी और नियर एक्सपायरी खाद्य सामग्री मिलने से स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो गए हैं. शिकायत सामने आने के बाद अस्पताल प्रशासन में हड़कंप मच गया और तत्काल बचे हुए किटों के वितरण पर रोक लगा दी गई.

सरकारी योजना पर लापरवाही का ग्रहण

आर्थिक रूप से कमजोर प्रसूताओं को पोषण और देखभाल के लिए सरकार की ओर से जच्चा-बच्चा किट उपलब्ध कराई जाती है. किट में नमकीन दलिया (350 ग्राम), घी का पैकेट, चावल खिचड़ी, दो प्रोटीन बार, राइस खीर और दो पीस बेसन बर्फी जैसी खाद्य सामग्री शामिल रहती है. लेकिन जिन महिलाओं के पोषण के लिए यह योजना बनाई गई थी, उन्हें ही एक्सपायरी सामग्री थमा दी गई.

20 अप्रैल को मिली थी किट, 91 पहले ही हो चुकी थीं वितरित

जानकारी के अनुसार, अनुमंडलीय अस्पताल को 20 अप्रैल 2026 को कुल 141 जच्चा-बच्चा किट प्राप्त हुए थे. इनमें से 91 किट प्रसूताओं के बीच बांटे जा चुके थे. इसी बीच एक महिला ने शिकायत की कि किट में मौजूद कुछ खाद्य सामग्री 5 मई 2026 को ही एक्सपायर हो चुकी थी. शिकायत के बाद जब अस्पताल प्रशासन ने किटों की जांच कराई तो मामला और गंभीर निकला. जांच में कुछ सामग्री एक्सपायरी मिली, जबकि कुछ सामग्री जून माह में एक्सपायर होने वाली पाई गई.

सीलबंद पैकेट का हवाला, जिम्मेदारी से बचने की कोशिश?

अस्पताल की उपाधीक्षक डॉ. प्रेमा कुमारी ने बताया कि जच्चा-बच्चा किट विभाग से पूरी तरह सीलबंद मिलती है. पैकेट बंद होने के कारण अंदर रखी सामग्री की एक्सपायरी डेट की जानकारी पहले नहीं मिल सकी. हालांकि सवाल यह भी उठ रहा है कि मरीजों में वितरण से पहले गुणवत्ता और सुरक्षा की कोई जांच क्यों नहीं की गई.

किट पर नहीं थी निर्माण और एक्सपायरी तिथि

उपाधीक्षक द्वारा सिविल सर्जन को भेजे गए पत्र में उल्लेख किया गया है कि किट के बाहरी पैकेट पर निर्माण और अवसान (एक्सपायरी) तिथि अंकित नहीं थी. इसी कारण अस्पताल स्तर पर इसकी जांच संभव नहीं हो सकी. मामले की जानकारी देते हुए शेष 50 किट के संबंध में भी विभाग से दिशा-निर्देश मांगे गए हैं.

सबसे बड़ा सवाल: आखिर जिम्मेदार कौन?

अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि एक्सपायरी और नियर एक्सपायरी सामग्री वाली किट अस्पताल तक पहुंची कैसे? क्या आपूर्ति करने वाली एजेंसी ने लापरवाही की, या फिर वितरण से पहले निगरानी की जिम्मेदारी निभाने में स्वास्थ्य विभाग विफल रहा? 91 किट पहले ही महिलाओं तक पहुंच चुकी हैं. ऐसे में यह मामला केवल प्रशासनिक चूक नहीं, बल्कि मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य से जुड़ा गंभीर प्रश्न बन गया है. जांच के बाद ही तय होगा कि इस लापरवाही की असली जिम्मेदारी किसकी है.

सिविल सर्जन ने दिए जांच के आदेश

सिविल सर्जन ने मामले को गंभीर बताते हुए जांच कराने की बात कही है. उन्होंने स्पष्ट कहा कि किसी भी परिस्थिति में प्रसूताओं को एक्सपायरी सामग्री उपलब्ध नहीं कराई जा सकती. पूरे मामले की जांच कर दोषियों के खिलाफ आवश्यक कार्रवाई की जाएगी.

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Published by: Suryakant Kumar

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