Buxar News : डुमरांव अनुमंडल की बिजली व्यवस्था को बेहतर बनाने की दिशा में डुमरांव 132/33 केवी पावर ग्रिड में 80 एमवीए क्षमता के नये पावर ट्रांसफार्मर की स्थापना शुरू हो गयी है. करीब 200 टन वजनी यह ट्रांसफार्मर नालंदा जिले के हरनौत ग्रिड से विशेष ट्रेलर के माध्यम से डुमरांव पहुंचा है. ट्रांसफार्मर के साथ जरूरी उपकरण और पुर्जे भी करीब आधा दर्जन ट्रकों से लाये गये हैं. विभागीय अभियंताओं के अनुसार सभी तकनीकी परीक्षण सफल रहने पर 10 से 12 दिनों के अंदर ट्रांसफार्मर को चार्ज कर चालू कर दिया जायेगा. इसके चालू होने से लो वोल्टेज, बार-बार ट्रिपिंग और ओवरलोड की समस्या से राहत मिलने की उम्मीद है.
26 हजार लीटर इंसुलेटिंग ऑयल भरने के बाद होगी जांच
सहायक कार्यपालक अभियंता अभिषेक कुमार ने बताया कि स्थापना के बाद ट्रांसफार्मर में करीब 26 हजार लीटर इंसुलेटिंग ऑयल भरा जायेगा. इसके बाद ऑयल का सैंपल जांच के लिए पटना स्थित प्रयोगशाला भेजा जायेगा. जांच रिपोर्ट आने में तीन से चार दिन लग सकते हैं. रिपोर्ट संतोषजनक मिलने के बाद ही ट्रांसफार्मर को चार्ज कर लोड दिया जायेगा. विभाग सुरक्षा मानकों को ध्यान में रखते हुए पूरी प्रक्रिया चरणबद्ध तरीके से पूरी कर रहा है.
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पिछली खराबी से लिया गया सबक, होगी विस्तृत तकनीकी जांच
डुमरांव ग्रिड में इससे पहले करीब 10 करोड़ रुपये की लागत से लगाया गया 80 एमवीए का ट्रांसफार्मर तकनीकी खराबी के कारण कुछ ही महीनों में खराब हो गया था. काफी प्रयास के बाद भी उसे दुरुस्त नहीं किया जा सका. इस बार नयी यूनिट को चालू करने से पहले ऑयल टेस्ट, लोड बैलेंसिंग और प्रोटेक्शन सिस्टम की विस्तृत जांच की जायेगी, ताकि किसी तरह की तकनीकी समस्या की आशंका को कम किया जा सके.
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वैकल्पिक व्यवस्था से जारी है बिजली आपूर्ति
नयी यूनिट के चालू होने तक विभाग ने वैकल्पिक व्यवस्था के तहत देवकुली ग्रिड से करीब 30 मेगावाट और बक्सर ग्रिड से 18 मेगावाट बिजली लेना शुरू किया है. वहीं पुराने 50 एमवीए ट्रांसफार्मर से ओवरलोड की स्थिति में करीब 45 मेगावाट आपूर्ति दी जा रही है. इसके माध्यम से अनुमंडल के सभी 11 फीडरों में बिजली आपूर्ति बनाये रखने का प्रयास किया जा रहा है. हालांकि ग्रामीण और सुदूर क्षेत्रों में लो वोल्टेज तथा ट्रिपिंग की शिकायतें अभी भी बनी हुई हैं.
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नयी यूनिट से उपभोक्ताओं को बड़ी उम्मीद
अधिकारियों के अनुसार 80 एमवीए ट्रांसफार्मर के चालू होने के बाद ग्रिड की क्षमता बढ़ेगी और ओवरलोड की समस्या में कमी आयेगी. वोल्टेज में स्थिरता आने से घरेलू उपभोक्ताओं के साथ उद्योग और व्यापारिक प्रतिष्ठानों को भी राहत मिलने की उम्मीद है. फिलहाल उपभोक्ताओं की नजर नये ट्रांसफार्मर की चार्जिंग और इसके चालू होने पर टिकी है.
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