Buxar News: मैया मोरी मैं नहीं माखन खायो का जीवंत दृश्य देख भावविभोर हुए श्रद्धालु

रामपुर गांव में चल रहे श्री लक्ष्मी नारायण महायज्ञ में वृंदावन धाम की प्रसिद्ध रासलीला मंडली के द्वारा जारी श्रीकृष्ण की लीलाओं के माध्यम से बताया गया कि भगवान श्रीकृष्ण लीलावतार हैं

चौसा

रामपुर गांव में चल रहे श्री लक्ष्मी नारायण महायज्ञ में वृंदावन धाम की प्रसिद्ध रासलीला मंडली के द्वारा जारी श्रीकृष्ण की लीलाओं के माध्यम से बताया गया कि भगवान श्रीकृष्ण लीलावतार हैं. व्रज में उनकी लीलाएं चलती ही रहती हैं. श्रीकृष्ण स्वयं रसरूप हैं.

वे अपनी रसमयी लीलाओं से सभी को अपनी ओर खींचते हैं. गोपियां प्राय: नंदभवन में ही टिकी रहतीं हैं. ‘कन्हैया कभी हमारे घर भी आयेगा. कभी हमारे यहां भी वह कुछ खायेगा. जैसे मैया से खीझता है, वैसे ही कभी हमसे झगड़ेगा-खीझेगा.’ ऐसी बड़ी-बड़ी लालसाएं उठती हैं गोपियों के मन में. श्रीकृष्ण भक्तवांछाकल्पतरू हैं. गोपियों का वात्सल्य-स्नेह ही उन्हें गोलोकधाम से यहां खींच लाया है. श्रीकृष्ण को अपने प्रति गोपियों द्वारा की गयी लालसा को सार्थक करना है और इसी का परिणाम माखनचोरी लीला है. श्रीकृष्ण की बाल लीला में दिखलाया गया कि एक दिन श्रीकृष्ण अपने सूने घर में ही माखनचोरी कर रहे थे. इतने में ही यशोदाजी आयीं तो वे डर गये और माता से बोले–’मैया ! यह जो तुमने मेरे कंगण में पद्मराग जड़ा दिया है, इसकी लपट से मेरा हाथ जल रहा था. इसी से मैंने इसे माखन के मटके में डालकर बुझाया था.’ यशोदामाता कन्हैया की मीठी-मीठी बातों से मुग्ध हो गयीं और सोचने लगीं कि देखो, मेरा नन्हा लाला कितना होशियार हो गया है.एक दिन श्रीकृष्ण मटकी में से माखन निकाल कर खाने लगते हैं.सहसा मणिस्तम्भ में उन्हें अपना प्रतिबिम्ब दीख पड़ता है. उन्हें प्रतीत होता है कि मेरे आने से पूर्व एक अन्य शिशु यहां आकर स्तम्भ से सटा खड़ा है.उन्हें भय होने लगता है कि कहीं ये मेरी चोरी मैया से प्रकट न कर दे.वे उसे प्रलोभित करने लगते हैं.श्रीकृष्ण मणिस्तम्भ से बातें कर रहे हैं–’अरे भैया ! मैया से कहियो मत, आज से हम दोनों साथी हुए. तू भी मेरे बराबर माखन खा ले, यह ले मैं भी माखन खा रहा हूँ, तू भी खा ले. जिनकी माया से मोहित होकर जगत के मूढ प्राणी ‘मैं-मेरे’ का प्रलाप करते हैं, उनका मणिस्तम्भ में अपना ही प्रतिबिम्ब देखकर भ्रमित हो जाना कितना मोहक है. मैया ने पूछा–’लाला तुम किससे बात कर रहे हो?’ श्रीकृष्ण ने कहा–’मैया, तेरे घर में एक माखनचोर आया है. मैं मना करता हूँ तो मानता ही नहीं. मैं क्रोध करता हूँ तो यह भी क्रोध करता है.’ यशोदामाता अपने शिशु की प्रतिभा देखकर आनन्दमग्न हो गयीं. उक्त प्रसंग को देख उपस्थित हजारों श्रद्धालु मंत्रमुग्ध हो गए. अगले दृश्य में दिखलाया गया कि यशोदाजी ने स्वयं श्रीकृष्ण को माखन चुराते देख लिया. उनका मुख दधि से सना हुआ था. मैया मैं नहिं माखन खायौ : गोपियां यह सब देख रहीं थीं. गोपियों के मन में आया कि कन्हैया अपनी माता के साथ जैसी लीला करता है, वैसी लीला हमारे घर में भी आकर करता तो हमारा कितना बड़ा सौभाग्य होता. गोपियों का तन, मन, धन सभी कुछ प्राणप्रियतम श्रीकृष्ण का था. प्रात:काल निद्रा टूटने से लेकर रात को सोने तक वे जो कुछ भी करती थीं, सब श्रीकृष्ण की प्रीति के लिए ही करती थीं. गोपियाँ श्रीकृष्ण प्रेम की पराकाष्ठा हैं. गोपियों के मन, वाणी और शरीर श्रीकृष्ण में ही तल्लीन थे. रात को दही जमाते समय कन्हैया की रूपमाधुरी का ध्यान करती हुई प्रत्येक गोपी यह इच्छा करती थी कि मेरा दही सुन्दर जमे, श्रीकृष्ण के लिए उसे बिलोकर मैं बढ़िया-सा और बहुत-सा माखन निकालूँ और उसे उतने ही ऊँचे छींके पर रखूँ जितने पर श्रीकृष्ण के हाथ आसानी से पहुँच सकें.फिर अगले दृश्य में श्रीकृष्ण ने अपने बाल सखाओं से कहते है कि..आओ माखन खाने का खेल खेलोगे?’माखन का खेल!’ दो-चार सखाओं ने एक-साथ आश्चर्य में भरकर कहा. फिर तो श्रीकृष्ण ने अपनी माखनचोरी लीला की विस्तृत योजना सखाओं के समक्ष रख दी–किस प्रकार हम लोग छिपकर प्रत्येक गोपी के घर में जायें, मैं माखन की मटकी उठा लाऊँ और फिर हम सब मिलकर खायँ, दूसरे पशु – पक्षियों को खिलायें, गिरायें, माखन की कीच मचायें. सुनकर गोपबालकों के आनन्द का पार नहीं. ताली पीट – पीटकर वे नाचने लगे. और नंदबाबा की कसम खाकर वे श्रीकृष्ण की बुद्धि की प्रशंसा करने लगे.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

प्रभात खबर डिजिटल प्रीमियम स्टोरी

लेखक के बारे में

By RAVIRANJAN KUMAR SINGH

RAVIRANJAN KUMAR SINGH is a contributor at Prabhat Khabar.

Tags

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >