बक्सर से 35 KM पैदल चलकर कैलाशपुरी धाम पहुंचे शिवभक्त, अंतिम सोमवारी पर उमड़ा भक्तों का भीड़

सावन की अंतिम सोमवारी पर बक्सर के कैलाशपुरी धाम में शिवभक्तों का तांता लगा। हर-हर महादेव के जयघोष से गूंजा मंदिर परिसर, जानें क्या है इस धाम की मान्यता।

Buxar News : कैथहरकला पंचायत के परसिया गांव स्थित कैलाशपुरी धाम में सावन की अंतिम सोमवारी पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी. बक्सर से गंगाजल लेकर बड़ी संख्या में शिवभक्त यहां पहुंचे और भगवान भोलेनाथ का जलाभिषेक कर पूजा-अर्चना की. सुबह से ही मंदिर परिसर में भक्तों का तांता लगा रहा और पूरा क्षेत्र हर-हर महादेव के जयकारों से गूंजता रहा.

ट्रैक्टर पर डीजे लगाकर पहुंचे शिवभक्त

कई श्रद्धालु ट्रैक्टरों पर डीजे लगाकर नाचते-झूमते कैलाशपुरी धाम पहुंचे. मंदिर पहुंचने के बाद भक्तों ने पोखरे में स्नान किया और प्राकृतिक शिवलिंग पर गंगाजल अर्पित कर पूजा-अर्चना की. इस दौरान पूरा मंदिर परिसर भक्तिमय माहौल में डूबा रहा.

मंदिर परिसर में मेले जैसा रहा माहौल

श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए मंदिर समिति की ओर से आवश्यक व्यवस्थाएं की गई थीं. मंदिर परिसर में पूजा सामग्री, फल और खान-पान की दुकानें सजी थीं. इससे पूरे इलाके में मेले जैसा माहौल बना रहा. श्रद्धालुओं को किसी तरह की परेशानी न हो, इसके लिए स्थानीय स्तर पर भी व्यवस्था की गई थी.

प्राकृतिक शिवलिंग बना आस्था का केंद्र

कैलाशपुरी शिव धाम कई वर्षों से श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र रहा है. यहां प्राकृतिक शिवलिंग स्थापित है. पंचायत के मुखिया प्रतिनिधि उपेंद्र सिंह यादव ने बताया कि सावन की प्रत्येक सोमवारी को दूर-दराज से श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं. सावन और महाशिवरात्रि के मौके पर मंदिर की विशेष सजावट की जाती है और शिवलिंग का फूल-चंदन से श्रृंगार किया जाता है.

श्रद्धालुओं के लिए सामुदायिक केंद्र और पेयजल की व्यवस्था

उपेंद्र सिंह यादव ने बताया कि श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए सामुदायिक केंद्र और पेयजल की व्यवस्था भी की गई है. कैलाशपुरी शिव धाम के महंथ देवेंद्र दास के अनुसार, मंदिर में स्थापित शिवलिंग काफी पुराना है और यहां वर्षों से श्रद्धालु पूजा-अर्चना के लिए पहुंचते रहे हैं.

नाग देवता को लेकर भी प्रसिद्ध है मंदिर

कैलाशपुरी धाम नाग देवता को लेकर भी प्रसिद्ध है. ग्रामीणों का मानना है कि सावन के महीने में मंदिर परिसर में नाग देवता दिखाई देते हैं और विचरण करते हैं. ग्रामीणों के अनुसार, नाग देवता किसी को नुकसान नहीं पहुंचाते. यह मान्यता आज भी श्रद्धालुओं के बीच आस्था और कौतूहल का विषय बनी हुई है.

35 KM पैदल चलकर पहुंचते हैं कांवरिया

श्रावण मास की प्रत्येक सोमवारी पर शिवभक्त बक्सर से गंगाजल लेकर करीब 35 किलोमीटर की दूरी पैदल तय कर कैलाशपुरी धाम पहुंचते हैं. मंदिर परिसर में सालभर हरिकीर्तन का आयोजन होता रहता है. सावन और महाशिवरात्रि के दौरान यहां श्रद्धालुओं की संख्या काफी बढ़ जाती है.


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By मृत्युंजय सिंह

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