चौसा
प्रखंड के रामपुर में चल रहे वृन्दावन धाम के आचार्य रमेश चंद्र मिश्रा के सानिध्य श्री लक्ष्मी नारायण महायज्ञ में वृंदावन धाम की प्रसिद्ध रासलीला मंडली के द्वारा रासलीला के पहले दिन श्रीकृष्ण जन्म प्रसंग का मंचन कर हजारों श्रद्धालुओं का मन मोह लिया. लीला में दिखाया गया कि जब-जब भी इस धरती पर पाप बढ़ा तथा अत्याचार से मुक्ति दिलाने के लिए परमात्मा इस धरती पर अवतार लेकर पापियों का नाश करते धर्म की रक्षा करते हैं. भगवान कृष्ण के अवतार का भी यही उद्देश्य था. भगवान कृष्ण ने विपरीत परिस्थितियों में जेल में जन्म लिया. माता देवकी व पिता वासुदेव जेल में बंद थे. जेल में कुछ भी नहीं दिखाई देता है वहां जन्म लेने वाले का भविष्य क्या होगा, परंतु भगवान कृष्ण जेल में जन्म लेने के बाद भी सबसे ऊंची जगह पर पहुंच गए. भगवान कृष्ण प्रत्येक परिस्थिति में सम रहते हैं. बाहर के व्यक्ति वस्तु और परिस्थिति उनके अंतर्मन को प्रभावित नहीं कर पाती है. सुख: दु:ख न तन में है ना भवन में है. कृष्ण के जीवन में कहीं ठहराव नहीं है. परंतु भीतर से ठहरे हुए हैं. मथुरा में जन्म लेते ही भगवान गोकुल चले गए और गोकुल से नंद और वहां से वापस मथुरा व मथुरा से द्वारिका चले गए. परंतु हमेशा मन से ठहरे हुए रहे. लीला के दरम्यान नंद घर आनंद भयो जय कन्हैया लाल की भजन गाया तो श्रद्धालु झूमने लगे व महिलाएं नृत्य करने लगी. सजे धजे पांडाल में वासुदेव द्वारा लाए गए कृष्ण के बाल रूप के हजारों श्रद्धालुओं ने दर्शन किए. कार्यक्रम के संचालनकर्ता गोपाल दास जी ने बताया आगामी 8 अप्रैल तक चलने वाले उक्त महायज्ञ में प्रतिदिन भागवत कथा और रासलीला चलता रहेगा.भागवत कथा के श्रवण से मनुष्य का होता हैडिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है
