Buxar News: सोंवां गांव में अलग से फीडर की मांग पर विभाग मौन

डुमरांव प्रखंड अंतर्गत सोंवां गांव के उपभोक्ता लंबे समय से स्थायी और निर्बाध बिजली आपूर्ति के लिए अलग से फीडर की मांग कर रहे हैं

कृष्णाब्रह्म . डुमरांव प्रखंड अंतर्गत सोंवां गांव के उपभोक्ता लंबे समय से स्थायी और निर्बाध बिजली आपूर्ति के लिए अलग से फीडर की मांग कर रहे हैं, लेकिन महीनों गुजर जाने के बाद भी इस पर कोई कार्रवाई नहीं हुई है. ग्रामीणों का कहना है कि बिजली विभाग को लिखित आवेदन देकर समस्या से अवगत कराया गया, मगर हर बार सिर्फ आश्वासन मिला, ठोस समाधान आज तक नहीं मिला. गांव के लोग बताते हैं कि 17 जुलाई 2024 को कार्यपालक अभियंता, बिजली विभाग बक्सर को पत्र सौंपा गया था, जिसमें साफ तौर पर बताया गया कि सोंवां गांव में स्थापित पावर ग्रिड से पर्याप्त मात्रा में बिजली नहीं मिल पा रही है. इसका मुख्य कारण यह है कि जिस फीडर से सोंवां गांव को बिजली दी जा रही है, उसी फीडर से रेहिया, नोनियापूरा, ढेंका, सरौरा, सरौरा डेरा, उड़ियानजंज, अमथुआ, अरियाव छतनवार, खरहाटाड और श्रीरामपुर जैसे कई अन्य गांवों को भी बिजली दी जाती है. इन क्षेत्रों में घने पेड़ और बांसवाड़ होने के कारण हल्की आंधी-पानी में ही तार टूटने, लाइन ट्रिप होने और सप्लाई बाधित होने की घटनाएं आम हो गई हैं, जिसका सीधा असर सोंवां गांव पर पड़ता है, बिजली की अनियमितता से गांव के लोग परेशान हैं. घरेलू जरूरतें पूरी नहीं हो पा रही हैं, खेतों की सिंचाई रुक-रुक कर हो रही है और छोटे-छोटे रोजगार पर संकट मंडरा रहा है. छात्र पढ़ाई में पिछड़ रहे हैं, ऑनलाइन क्लास और मोबाइल चार्जिंग की दिक्कत से उनका पढ़ाई का समय बर्बाद हो रहा है. छोटे दुकानदार और मशीनरी से जुड़े कारीगर उपकरण न चला पाने से नुकसान झेल रहे हैं। गर्मी के मौसम में पीने के पानी की समस्या और गंभीर हो जाती है, क्योंकि पानी का मोटर बिजली न होने पर घंटों बंद रहता है. अमित सिंह का कहना है कि हमारे समय में लालटेन के भरोसे घर चलता था, सोचा था अब हमारे बच्चे उजाले में पढ़ेंगे, लेकिन हाल वही पुराना हो गया. बस फर्क इतना कि अब बिजली आती है तो भी भरोसे लायक नहीं. ग्रामीणों का आरोप है कि विभाग का रवैया सिर्फ ‘आश्वासन देने’ तक सीमित है. हर बार यही कहा जाता है कि समस्या का समाधान जल्द होगा, लेकिन न तो अब तक कोई सर्वे हुआ, न अलग फीडर की योजना को मंजूरी मिली. पंचायत समिति सदस्य आलम हुसैन का कहना है कि यह सिर्फ बिजली की समस्या नहीं है, यह विकास की रफ्तार पर ताला लगाने जैसा है. हमने आवेदन दिया, हस्ताक्षर अभियान चलाया, लेकिन विभाग शायद चाहता है कि हम सड़क पर उतरें.

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