Buxar News : महर्षि विश्वामित्र महाविद्यालय, बक्सर के रसायन विज्ञान विभाग में मंगलवार, 1 सितंबर 2026 से स्नातक प्रथम सेमेस्टर (सत्र 2026-30) के छात्र-छात्राओं की प्रयोगशाला कक्षाओं का शुभारंभ हुआ. प्रथम दिन आयोजित प्रयोगशाला कक्षा में महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो. (डॉ.) केके सिंह भी उपस्थित रहे. उन्होंने विद्यार्थियों को प्रयोगशाला कार्य को गंभीरता से करने और नियमित रूप से कक्षाओं में उपस्थित रहने के लिए प्रेरित किया.
प्राचार्य ने विद्यार्थियों को किया प्रोत्साहित
प्राचार्य प्रो. डॉ. केके सिंह ने विद्यार्थियों का उत्साहवर्धन करते हुए कहा कि रसायन विज्ञान को बेहतर तरीके से समझने के लिए केवल सैद्धांतिक ज्ञान पर्याप्त नहीं है. विषय की वास्तविक समझ के लिए प्रयोगशाला में प्रयोगों को स्वयं करना भी जरूरी है. उन्होंने विद्यार्थियों को नियमित अभ्यास, अनुशासन और मेहनत के साथ प्रयोगशाला कार्य करने की सलाह दी. उन्होंने कहा कि प्रयोगात्मक अध्ययन से विद्यार्थियों में विषय के प्रति रुचि और आत्मविश्वास बढ़ता है.
मानक विलयन तैयार करने का कराया गया प्रयोग
प्रयोगशाला कक्षा के पहले दिन विद्यार्थियों को विभिन्न मोलरता और नॉर्मलता की सांद्रता वाले मानक विलयन तैयार करने का प्रयोग कराया गया. रसायन विज्ञान विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. भरत कुमार और रसायन विज्ञान प्रयोगशाला के प्रभारी डॉ. रवि कुमार ठाकुर ने विद्यार्थियों को प्रयोग की पूरी विधि समझायी. साथ ही प्रयोग के दौरान बरती जाने वाली सावधानियों और प्रयोगशाला में अपनायी जाने वाली वैज्ञानिक प्रक्रियाओं की जानकारी दी.
शिक्षकों ने प्रयोग के दौरान किया मार्गदर्शन
प्रयोग के दौरान रसायन विज्ञान विभाग की सहायक प्राध्यापक डॉ. सीमा द्विवेदी और डॉ. सुमन श्रीवास्तव ने विद्यार्थियों का मार्गदर्शन किया. शिक्षकों ने छात्र-छात्राओं को प्रयोग सावधानीपूर्वक करने और प्रयोगशाला के निर्धारित नियमों का पालन करने के लिए प्रेरित किया. विद्यार्थियों ने भी उत्साहपूर्वक प्रयोग में हिस्सा लिया और मानक विलयन तैयार करने की प्रक्रिया को स्वयं करके समझा.
वैज्ञानिक दृष्टिकोण विकसित करना उद्देश्य
महाविद्यालय में प्रयोगशाला कक्षाओं के आयोजन का उद्देश्य विद्यार्थियों में वैज्ञानिक दृष्टिकोण, प्रयोगात्मक कौशल, आत्मविश्वास और विषय के प्रति रुचि विकसित करना है. विभाग की ओर से विद्यार्थियों को नियमित रूप से प्रयोगों में भाग लेने और सैद्धांतिक ज्ञान को व्यावहारिक प्रयोगों से जोड़ने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है.
