प्रतिनिधि, चौसा (बक्सर). चौसा नगर पंचायत क्षेत्र में बंदरों के बढ़ते आतंक से लोगों में दहशत का माहौल है. अखौरीपुर गोला, नरबतपुर समेत आसपास के इलाकों में पिछले कई दिनों से बंदरों के हमले की घटनाएं सामने आ रही हैं. खासकर बच्चों और महिलाओं में बंदरों को लेकर भय बना हुआ है.
दर्जनों बच्चे और महिलाएं हो चुके हैं घायल
स्थानीय लोगों के अनुसार अब तक दर्जनों बच्चे और महिलाएं बंदरों के हमले में घायल हो चुके हैं. घायलों का इलाज सरकारी और निजी अस्पतालों में कराया जा रहा है. लगातार हो रही घटनाओं के कारण लोगों में घर से बाहर निकलने को लेकर भी डर का माहौल बना हुआ है.
स्कूल परिसर में घुसा बंदरों का झुंड, 4 बच्चे घायल
पिछले दिनों अखौरीपुर गोला स्थित एक निजी स्कूल में बंदरों के झुंड ने अचानक परिसर में प्रवेश कर दिया. इसके बाद बंदरों ने चार बच्चों पर हमला कर उन्हें काटकर घायल कर दिया. अचानक हुए हमले से स्कूल परिसर में अफरा-तफरी मच गई.
शिक्षकों और स्थानीय लोगों ने बच्चों को बचाया
बंदरों के हमले के बाद स्कूल के शिक्षकों और स्थानीय लोगों ने काफी मशक्कत कर बच्चों को सुरक्षित बाहर निकाला. घायल बच्चों को इलाज के लिए अस्पताल ले जाया गया. घटना के बाद बच्चों के अभिभावकों में भी चिंता बढ़ गई है और वे स्कूल आने-जाने वाले बच्चों की सुरक्षा को लेकर परेशान हैं.
अखौरीपुर गोला और नरबतपुर में ज्यादा परेशानी
स्थानीय लोगों का कहना है कि अखौरीपुर गोला, नरबतपुर और आसपास के इलाकों में बंदरों की संख्या बढ़ गई है. बंदरों के झुंड रिहायशी इलाकों के अलावा स्कूल परिसर में भी पहुंच रहे हैं. इससे बच्चों, महिलाओं और बुजुर्गों की सुरक्षा को लेकर चिंता बनी हुई है.
मुख्य पार्षद ने DM को सौंपा ज्ञापन
समस्या के समाधान को लेकर चौसा नगर पंचायत की मुख्य पार्षद किरण देवी ने जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपा है. उन्होंने क्षेत्र में बढ़ते बंदरों के आतंक की जानकारी देते हुए प्रशासन से कार्रवाई की मांग की है. मुख्य पार्षद ने कहा कि बंदरों की संख्या तेजी से बढ़ रही है और इनके स्कूलों व रिहायशी इलाकों में पहुंचने से लोगों की सुरक्षा पर खतरा बना हुआ है.
बंदरों को पकड़ने के लिए विशेष अभियान की मांग
मुख्य पार्षद ने प्रशासन से बंदरों को पकड़ने के लिए विशेष अभियान चलाने की मांग की है. साथ ही उन्होंने इस समस्या का स्थायी समाधान निकालने की अपील की है, ताकि स्कूल जाने वाले बच्चों और आम लोगों को बंदरों के हमले के डर से राहत मिल सके.
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