Buxar News: चक्की में कैटल ट्रफ योजना वर्षों से बंद, गर्मी से पशु, पक्षी बेहाल

भीषण गर्मी व लू से बेजुबान पशुओं की परेशानी बढ़ गयी है. तालाब और पोखर सब सूख गए हैं.

चक्की. भीषण गर्मी व लू से बेजुबान पशुओं की परेशानी बढ़ गयी है. तालाब और पोखर सब सूख गए हैं. पशुओं को पीने का पानी उपलब्ध कराने वाली योजना कैटल ट्रफ भी बंद पड़ी है. ऐसे में पशु व मत्स्य संसाधन विभाग केवल जांच कर खानापूर्ति करने में जुटा है. चक्की प्रखंड अंतर्गत अरक पंचायत स्थित कैटल ट्रफ जल योजना वर्षों से बंद पड़ी है. मिली जानकारी के अनुसार कैटल ट्रफ योजना विगत कई वर्षों से बंद पड़ी है. इस संबंध में जानकारी देते हुए पशु चिकित्सक कुमारी मनीषा ने बताया कि कैटल ट्रफ योजना की पटना से आये टीमों के द्वारा जांच कि गयी थी. जांच के दौरान उन लोगों ने बताया कि यह योजना किसी की निजी भूमि पर लगाया गया है. निजी भूमि पर होने के कारण कैटल ट्रफ योजना को चालू नहीं किया जा सकता है. सबसे बड़ी बात यह है कि इस योजना की निर्माण कराते समय ही विभाग को जांच करानी चाहिए थी कि भूमि कैसा है. हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि किसी अधिकारी के द्वार यह लिखित नहीं दिया गया है. लेकिन मौखिक रूप से यही बताया गया है. बताते चलें कि कैटल ट्रफ योजना को चालू कराने के लिए पिछले कई वर्षों से लोग मांग कर रहे हैं. अधिकारियों द्वारा पिछले साल से जांच भी कराई जा रही है. पुरे एक साल की जांचों परांत में यह पता चला कि सरकारी भूमि पर योजना नहीं होने के कारण इसे मरम्मत व चालू नहीं किया जायेगा. ऐसे में बेजुबान पशु अपनी प्यास बुझाने के लिए दर-दर भटक रहे है. इस भीषण गर्मी में यदि कैटल ट्रफ योजना ठीक होती तो पशुओं को पीने के लिए पानी मिल जाता. स्थानीय लोगों ने बताया कि कई बार विभाग को इस संबंध में अवगत कराया गया. हालांकि अभी तक इस योजना को चालू नहीं कराया गया है. बताते चलें कि स्थानीय लोगों के शिकायत करने पर कैटल ट्रफ योजना की मरम्मत कर चालू कराने के लिए पिछले साल डॉक्टर के भी द्वारा वरीय पदाधिकारी सह उपसमाहर्ता बक्सर को आवेदन दिया गया था. मालूम हो कि इस समय जिले का पारा 40 डिग्री के उपर रह रहा है. ऐसे में सबकी परेशानी बढ़ी हुई है. बेजुबान पशुओं का क्या हाल होगा , इसका अंदाजा खुद लगाया जा सकता है. प्रखंड क्षेत्र के सभी नहर , पोखर का पानी सूख गया है. इस वजह से पशुओं को इस भीषण गर्मी में पानी पीने के लिए दर-दरभटकना पड़ रहा है. दूसरी ओर बंद पड़ी योजना का विभाग के द्वारा केवल जांच कर खानापूर्ति किया जा रहा है.

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