Buxar Weather News : पिछले 15 दिनों से भीषण गर्मी और जानलेवा लू की मार झेल रहे प्रखंड वासियों को सोमवार की सुबह हुई हल्की बारिश से थोड़ी राहत मिली है. स्थानीय लोगों ने बताया कि रविवार की शाम से ही अचानक मौसम का मिजाज बदला और आसमान में काले बादल छा गए थे. इसके बाद रात में हल्की बूंदाबांदी हुई, जो कुछ देर बाद बंद हो गई. वहीं, सोमवार की सुबह करीब 7 बजे हुई झमाझम बारिश ने कुछ मिनटों के लिए मौसम को सुहाना बना दिया और लोगों को भीषण गर्मी से आंशिक निजात दिलाई.
मौसम मापी यंत्र में 0.4 मिलीमीटर बारिश दर्ज
इस संबंध में किसान सलाहकार दिलीप कुमार शर्मा ने बताया कि प्रखंड कृषि कार्यालय के मौसम मापी यंत्र में सोमवार को 0.4 मिलीमीटर (mm) बारिश दर्ज की गई है. भले ही यह बारिश बहुत अधिक नहीं थी, लेकिन इससे तापमान में गिरावट आई है. सोमवार को मौसम सामान्य होने और तापमान गिरने से ग्रामीण बाजारों में भी काफी दिनों बाद अच्छी रौनक देखने को मिली.
धान के बिचड़े बचाने के लिए निजी ट्यूबवेल और नहर का सहारा
इधर, किसानों का कहना है कि यह बारिश खेती के लिए बेहद नाकाफी है. बारिश कम होने के कारण किसान धान की नर्सरी (बिचड़ा) बचाने के लिए निजी ट्यूबवेल और नहर के पानी का सहारा ले रहे हैं. करूअज गांव के किसान बीरेंद्र सिंह मौर्य ने बताया कि हल्की बारिश से जमीन में थोड़ी नमी जरूर आई है. अब ऐसा लग रहा है कि अगले 10 दिनों में बिचड़ा पूरी तरह तैयार हो जाएगा, जिसके बाद खेतों में धान रोपनी का काम शुरू कर दिया जाएगा.
रात-रात भर जागकर खेत पटा रहे किसान
मठिला गांव के किसान श्यामलाल पासवान ने बताया कि उन्हें कंझरूआ नहर के सहारे करहा (जलमार्ग) से पानी मिलता है. फिलहाल किसान अपने निजी ट्यूबवेल से मोटी रकम खर्च कर बिचड़ों को सूखने से बचा रहे हैं. बिचड़ों की स्थिति को देखने से ऐसा लग रहा है कि अगर आगामी तीन-चार दिनों के भीतर अच्छी बारिश हो जाए, तो धान की रोपनी समय पर संपन्न हो जाएगी.
अच्छी बारिश का इंतजार
किसानों ने बताया कि नहर में पानी आया हुआ है, इसलिए वे रात-रात भर जागकर अपने खेतों को पटा रहे हैं. इस हल्की बारिश से किसानों में यह उम्मीद भी जगी है कि अब मॉनसून जल्द ही पूरी तरह सक्रिय हो जाएगा.
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