Buxar News : (संतोष कांत): बक्सर जिले के ग्रामीण इलाकों में एक बार फिर चुनावी सरगर्मियां उफान पर हैं. वर्ष 2026 में होने वाले आगामी त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव को लेकर राज्य निर्वाचन आयोग के निर्देश के बाद जिला प्रशासन ने अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं.
इस बार का पंचायत चुनाव बक्सर जिले की ग्रामीण राजनीति की तस्वीर को पूरी तरह बदलने वाला साबित होगा. जिले के सभी प्रखंडों की ग्राम पंचायतों में वार्ड सदस्य से लेकर जिला परिषद सदस्य तक के पदों पर आरक्षण का स्वरूप पूरी तरह बदलने जा रहा है. नए सिरे से और वर्तमान जनसंख्या के आंकड़ों को आधार मानकर किए जा रहे इस बदलाव से संभावित उम्मीदवारों और वर्तमान जनप्रतिनिधियों के बीच गुणा-भाग का दौर शुरू हो गया है.
जानिए…क्यों बदल रहा है आरक्षण का चक्र
बिहार पंचायती राज अधिनियम के कड़े प्रावधानों के अनुसार, कोई भी पद लगातार दो आम चुनावों से अधिक समय तक एक ही श्रेणी के लिए आरक्षित नहीं रखा जा सकता है. दो चुनावों के बाद आरक्षण का चक्र (रोटेशन) बदलना कानूनी रूप से अनिवार्य है.आरक्षण निर्धारण के तहत बक्सर जिले में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST), अत्यंत पिछड़ा वर्ग (EBC) और महिलाओं को मिलाकर कुल पदों पर अधिकतम 50 प्रतिशत तक आरक्षण देने का प्रावधान लागू रहेगा.
- तीन बिंदु से समझिये
- SC/ST आरक्षण: नियमों के मुताबिक, अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति को उनकी स्थानीय आबादी के सटीक अनुपात में आरक्षण दिया जाता है.
- अत्यंत पिछड़ा वर्ग (EBC): आबादी के अनुपात के बाद शेष बचे पदों में से अत्यंत पिछड़ा वर्ग के लिए करीब 20 प्रतिशत सीटें आरक्षित की जाएंगी.
- महिला आरक्षण: बिहार में वर्ष 2006 से लागू ऐतिहासिक कानून के तहत इस बार भी जिले के कुल पदों में से आधे (50 प्रतिशत) पद आधी आबादी यानी महिलाओं के लिए आरक्षित रहेंगे.
पुराने दिग्गजों को झटका, नए चेहरों के खुले रास्ते
आरक्षण के इस नए बदलाव से बक्सर जिले की पंचायत राजनीति के धुरंधरों को बड़ा झटका लगने की संभावना है। कई ऐसे कद्दावर नेता जो पिछले 10 वर्षों से अपनी सीटों पर काबिज थे, उनकी सीटें इस बार उनके वर्ग से बाहर हो सकती हैं. सीटों के रोटेशन के कारण कई पुराने चेहरों को चुनावी मैदान से बाहर होना पड़ सकता है.
दूसरी तरफ, इस बदलाव ने बक्सर के युवाओं, नए चेहरों और उन वर्गों के लिए चुनावी मैदान में उतरने का सुनहरा रास्ता खोल दिया है, जिन्हें पिछले दो चुनावों से प्रतिनिधित्व का मौका नहीं मिल सका था। कुल मिलाकर, बक्सर जिले में इस बार का पंचायत चुनाव बेहद दिलचस्प और अप्रत्याशित नतीजों वाला होने की उम्मीद है।
क्या होगा असर
बक्सर जिले में पिछले दो पंचायत चुनावों (वर्ष 2016 और वर्ष 2021) में जो पद लगातार एक ही जातिगत कोटि के लिए आरक्षित थे, उनका मुक्त होना अब तय है. उदाहरण के लिए, यदि किसी पंचायत में मुखिया का पद पिछले दो बार से SC या EBC के लिए आरक्षित था, तो इस बार वह सामान्य (अनारक्षित) या महिला कोटि में जा सकता है. इसी तरह, जो सीटें पिछले दो बार से सामान्य थीं, वे अब आरक्षित श्रेणियों के पाले में चली जाएंगी.
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