बक्सर में नहरों में आया पानी, फिर भी अंतिम छोर तक नहीं पहुंची सिंचाई; धान रोपनी की रफ्तार सुस्त

Buxar News : बक्सर के राजपुर प्रखंड में नहरों में पानी तो आ गया है, लेकिन अंतिम छोर तक नहीं पहुंचने से धान की रोपाई प्रभावित है. मानसून की देरी और गिरते भूजल स्तर ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है, जिससे बड़े पैमाने पर खेत परती रहने की आशंका है.

Buxar News : बक्सर के राजपुर प्रखंड के सभी राजवाहा में सोन नहर का पानी आ गया है, फिर भी अंतिम छोर तक पानी नहीं पहुंच पाया है. समय पर मानसून नहीं आने से इस बार भी खेती प्रभावित होने की उम्मीद बढ़ गई है. कृषि विभाग की तरफ से इस बार लगभग 21,000 हेक्टेयर भूमि पर खेती का लक्ष्य रखा गया है, जिसके अनुपात में अब तक सिर्फ दो प्रतिशत ही धान रोपनी का काम हुआ है. दर्जनों गांव के किसान मानसून की उम्मीद लगाए धान के बिचड़े को बचाने में लगे हैं. जिन किसानों के पास समरसेबल है, वे किसान इलेक्ट्रिक मोटर या डीजल इंजन चलाकर धान रोपनी का काम शुरू कर दिए हैं.

भूमिगत जलस्तर नीचे गिरने से बोरिंग फेल

पिछले वर्ष भी तेज धूप एवं मौसम में बदलाव से भूमिगत जलस्तर काफी नीचे हो गया था. इस बार भी लगातार पानी का खिंचाव होने से भूमिगत जलस्तर नीचे चला गया है. पहले से जिन किसानों के खेतों में बोरिंग है, वे बोरिंग फेल हो गए हैं. ऐसे में किसानों के सामने बड़ी समस्या हो गई है. अगर कोई किसान अपने खेत में समरसेबल कराना चाहता है, तो उसकी लागत खर्च लगभग दो से ढाई लाख रुपये हो रही है. आर्थिक तंगहाली से जूझ रहे किसान धान रोपनी के समय इतना महंगा समरसेबल नहीं करा सकते हैं. ऐसे में अभी भी सैकड़ों एकड़ खेत परती पड़े हुए हैं.

जमौली और खीरी राजवाहा में पानी कम

पश्चिमी क्षेत्र के लिए जीवनदायिनी कही जाने वाली जमौली और खीरी राजवाहा में पर्याप्त पानी नहीं आया है. कृषि समन्वयक संजय सिंह ने बताया कि अभी नहर के पानी से रोपनी कर पौधों को जीवन रक्षक पानी देते रहें. जुलाई के अंत तक रोपनी होने पर खेती पर कम प्रभाव पड़ेगा.

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Author: Kamal pankaj

Published by: Suryakant Kumar

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