Buxar News( ब्रह्मपुर से संतोष कांत की रिपोर्ट ):
रविवार की शाम आई तेज आंधी और बारिश के कारण चार भागों में बंटे नैनीजोर पीपा पुल हादसे में एक बड़ा और चौंकाने वाला खुलासा हुआ है. स्थानीय ग्रामीणों और प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार इस पुल को समय से पहले जर्जर और खोखला करने में सिर्फ अवैध बालू माफिया ही नहीं बल्कि खुद सरकारी तंत्र और बाढ़ सुरक्षा के लिए बन रहे तटबंध के संवेदक भी बराबर के हिस्सेदार हैं.
बाढ़ से सुरक्षा के लिए इलाके में चल रहे तटबंध निर्माण कार्य के लिए भारी मात्रा में बालू की ढुलाई इसी पीपा पुल के रास्ते की जा रही थी. सरकारी काम का हवाला देकर क्षमता से कई गुना अधिक भारी ट्रैक्टर-ट्रॉली और मिनी हाइवा दिन-रात इस कमजोर पुल से गुजारे जा रहे थे. इससे पुल की बची-खुची रीढ़ भी टूटती चली गई.
बाढ़ से बचाने की तैयारी ने छीन ली आवागमन की लाइफलाइन
विडंबना यह है कि जिस विभाग और संवेदक को बरसात से पहले तटबंध का काम पूरा कर ग्रामीणों को बाढ़ से बचाना था. उसी के वाहनों ने ग्रामीणों के आवागमन की एकमात्र लाइफलाइन बने पीपा पुल को ही नुकसान पहुंचा दिया. ग्रामीणों ने बताया कि जब भी अवैध बालू माफियाओं को रोका जाता था तो वे भाग खड़े होते थे. लेकिन जब तटबंध निर्माण में लगे ओवरलोडेड वाहनों को टोकने का प्रयास किया गया तो सरकारी काम में बाधा डालने का डर दिखाकर स्थानीय लोगों का मुंह बंद करा दिया गया.
लगातार हफ्तों से चल रही इस भारी ढुलाई के कारण पीपों के जोड़ पहले ही कमजोर हो चुके थे. रविवार की शाम जैसे ही तेज हवा का दबाव बना और नदी की लहरें उठीं. जर्जर हो चुका यह पुल भरभराकर चार हिस्सों में अलग हो गया.
ठेकेदार और प्रशासन की मिलीभगत का नतीजा
स्थानीय निवासियों का कहना है कि एक तरफ माफिया रात में बालू चुरा रहे थे. दूसरी तरफ तटबंध के ठेकेदार दिन के उजाले में सरकारी काम के नाम पर ओवरलोडेड गाड़ियां दौड़ा रहे थे. दोनों ने मिलकर इस पुल को खत्म कर दिया. अब न हमारे पास पुल बचा है और न ही समय पर तटबंध बन पाने की उम्मीद.
दोतरफा संकट: संपर्क भी टूटा, बाढ़ का खतरा भी बढ़ा
पुल के चार टुकड़ों में बंटने से अब दोहरी मुसीबत खड़ी हो गई है. एक तरफ 50 हजार से अधिक आबादी का जिला मुख्यालय और उत्तर प्रदेश से संपर्क पूरी तरह कट गया है. दूसरी तरफ तटबंध निर्माण कार्य भी पूरी तरह ठप हो गया है. क्योंकि बांध के लिए बालू और अन्य निर्माण सामग्री की आपूर्ति इसी पुल के जरिए हो रही थी.
जून का महीना शुरू होने वाला है और मानसून सिर पर है. ऐसे में यदि तटबंध का काम समय पर पूरा नहीं हुआ तो आने वाले दिनों में दर्जनों गांवों पर बाढ़ का खतरा और गहरा सकता है.
अधिकारियों ने साधी चुप्पी, जांच के आदेश
जब इस संबंध में बाढ़ नियंत्रण विभाग और स्थानीय प्रशासनिक अधिकारियों से बात करने की कोशिश की गई तो उन्होंने इस पूरे मामले पर चुप्पी साध ली. हालांकि बक्सर जिला प्रशासन के एक वरिष्ठ अधिकारी ने नाम नहीं छापने की शर्त पर बताया कि इस बात की जांच की जाएगी कि तटबंध निर्माण में लगे वाहनों को पीपा पुल से ओवरलोडेड स्थिति में गुजरने की अनुमति किसने दी.
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