बक्सर से विष्णुदत्त द्विवेदी की रिपोर्ट
Buxar News : जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीश सह पॉक्सो अदालत के विशेष न्यायाधीश अमित कुमार शर्मा एक मामले की सुनवाई के दौरान पुलिसिया कार्रवाई को लेकर खासा नाराज दिखे. उन्होंने अपने एक महत्वपूर्ण फैसले के दौरान कहा कि अदालत इस बात पर आश्चर्यचकित है कि जब जांच अधिकारी ने पाया कि मामला झूठा है, तो सूचिका के खिलाफ कार्रवाई की सिफारिश क्यों नहीं की.
पुलिस को देना होगा स्पष्टीकरण
न्यायाधीश ने कहा कि पॉक्सो अधिनियम की धारा 22 के तहत झूठा मुकदमा दर्ज करने वालों के खिलाफ अभियोजन का स्पष्ट प्रावधान है. ऐसे में जांच अधिकारी को लिखित स्पष्टीकरण देने का निर्देश दिया जाता है कि कानून का दुरुपयोग करने वालों के खिलाफ कार्रवाई क्यों नहीं की गई. इस आदेश की प्रति आगे की कार्रवाई के लिए एसपी को भी अग्रसारित की गई है.
झूठा केस करने वालों में हड़कंप
अदालत के उक्त आदेश के बाद झूठा मुकदमा दाखिल करने वालों में हड़कंप मच गया है. वहीं, ऐसे मामलों में अब पुलिस की परेशानियां भी बढ़ जाएंगी, जहां अनुसंधान के बाद फाइनल रिपोर्ट में क्लीन चिट देकर पुलिस चुपचाप बैठ जाती है.
गंभीर आरोपों में दर्ज हुई थी FIR
बताते चलें कि बक्सर मुफस्सिल थाना में दर्ज एक मामले की सुनवाई पॉक्सो के विशेष न्यायाधीश अमित कुमार शर्मा की अदालत में की जा रही थी. इसमें एक महिला ने कई लोगों पर प्राथमिकी दर्ज कराई थी. उक्त घटना में उसके साथ उसकी छोटी बच्ची भी पीड़िता थी. प्राथमिकी में काफी गंभीर आरोप और कई संगीन धाराएं लगाई गई थीं.
फाइनल रिपोर्ट को गंभीरता से लिया
इसी सुनवाई के क्रम में पुलिस ने इस आशय के साथ विगत 31 मई को फाइनल रिपोर्ट न्यायालय में समर्पित की थी कि यह पूरा मामला झूठा है. न्यायालय द्वारा इस बात को काफी गंभीरता से लिया गया है और अब जांच अधिकारी से जवाब तलब किया गया है.
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