बदलते मौसम ने छीनी मधुमक्खी पालकों की मिठास, लाखों का नुकसान, 100 से अधिक बक्सों की मधुमक्खियां मरीं

Buxar News : बक्सर के राजपुर प्रखंड के रसेन गांव के प्रगतिशील मधुमक्खी पालक उमेश सिंह को मौसम के बदलते मिजाज और भीषण गर्मी के कारण चार लाख रुपये से अधिक का नुकसान हुआ है.

राजपुर से पंकज कमल की रिपोर्ट
Buxar News :
जलवायु परिवर्तन और मौसम के बदलते मिजाज ने अब मधुमक्खी पालन व्यवसाय की कमर तोड़नी शुरू कर दी है. राजपुर प्रखंड के रसेन गांव के प्रगतिशील मधुमक्खी पालक किसान उमेश सिंह इन दिनों भारी आर्थिक संकट से जूझ रहे हैं. मौसम में अचानक हुए बदलाव और भीषण गर्मी के कारण उन्हें इस सीजन में अब तक चार लाख रुपये से अधिक का नुकसान हो चुका है, जिससे किसानों और उनके साथ जुड़े मजदूरों में भारी निराशा देखने को मिल रही है.

मुजफ्फरपुर से झारखंड तक का सफर भी रहा बेअसर

उमेश सिंह ने बताया कि वे बेहतर शहद उत्पादन के लिए मौसम और फूलों की उपलब्धता के अनुसार विभिन्न राज्यों व जिलों में प्रवास करते हैं. इस सीजन में उन्होंने सबसे पहले बिहार के मुजफ्फरपुर जिले के प्रसिद्ध लीची बागानों में अपने मधुमक्खी के बक्से रखे थे. लेकिन वहां जलवायु में अचानक हुए बदलाव के कारण शहद का उत्पादन अनुकूल नहीं रहा.

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Honey Farming : झारखंड के रामगढ़ में डेरा

इसके बाद वे बेहतर उत्पादन की उम्मीद में अपने सभी बक्सों को झारखंड के रामगढ़ क्षेत्र में मक्के के खेतों के पास ले गए. अमूमन फरवरी के अंतिम सप्ताह में देश के कई राज्यों के मधुमक्खी पालक किसान अपने बक्सों के साथ इन क्षेत्रों में डेरा डाल देते हैं और नवंबर में वापस बिहार लौटते हैं.

सांकेतिक तस्वीर

भीषण गर्मी से 100 से अधिक बक्सों की मधुमक्खियां मरीं

पिछले एक महीने से लगातार बढ़ रहे तापमान और भीषण गर्मी के कारण रामगढ़ में लगभग 100 से अधिक बक्सों की मधुमक्खियां मर चुकी हैं. सामान्य मौसम रहने पर अब तक कई बार शहद का निष्कासन (Extraction) हो जाना चाहिए था, लेकिन इस बार प्रतिकूल परिस्थितियों के चलते शहद का उत्पादन नाममात्र का भी नहीं हो सका है.

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चार लाख से ज्यादा का नुकसान

जलवायु में तेजी से हो रहा बदलाव मधुमक्खियों के विकास चक्र और उनके व्यवहार को बुरी तरह प्रभावित कर रहा है. वर्तमान में फूल बहुत कम समय के लिए खिलकर समाप्त हो जा रहे हैं, जिससे मधुमक्खियों को पर्याप्त अमृत (नेक्टर) और पराग (पॉलेन) नहीं मिल पा रहा है. पिछले साल भी गर्मी के कारण भारी क्षति हुई थी और इस साल भी चार लाख से अधिक का नुकसान हो चुका है.

सांकेतिक तस्वीर

मजदूरों के सामने खड़ा हुआ रोजी-रोटी का संकट

इस व्यवसाय से न सिर्फ किसान बल्कि कई गरीब परिवारों की आजीविका भी जुड़ी हुई है. उमेश सिंह के साथ लगभग 14 मजदूर लगातार इस काम में लगे रहते हैं. शहद का उत्पादन ठप होने और भारी आर्थिक घाटे के कारण इस बार इन मजदूरों को मासिक वेतन देना भी मुश्किल हो गया है, जिससे उनके सामने भी रोजी-रोटी का गंभीर संकट खड़ा हो गया है. मक्के की फसल में फूल आने का समय अब अपने अंतिम चरण में है.

व्यवसाय बचाना बड़ी चुनौती

किसानों का कहना है कि मक्के का फूल समाप्त होने और बारिश शुरू होने के साथ ही कुछ समय के लिए मधुमक्खी पालन का यह काम पूरी तरह बंद हो जाएगा. ऐसे में बिना सरकारी सहायता या फसल बीमे के, इस तरह के प्रगतिशील किसानों के लिए इस पारंपरिक और पर्यावरण-अनुकूल व्यवसाय को बचाए रखना एक बड़ी चुनौती बनता जा रहा है.

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By Kumarsuryakant

सूर्यकांत कुमार तीन वर्षों से हिंदी डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं. स्थानीय और हाइपरलोकल पत्रकारिता में विशेष अनुभव रखते हैं. कंटेंट राइटिंग के साथ-साथ वीडियो एडिटिंग और वॉयस ओवर का भी व्यावहारिक अनुभव रखते हैं. उन्होंने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत एक डिजिटल न्यूज चैनल से की और विभिन्न डिजिटल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर कार्य करते हुए समाचार लेखन और डिजिटल कंटेंट प्रोडक्शन का अनुभव हासिल किया है. इसके अलावा खेल और मनोरंजन से जुड़ी खबरों में भी विशेष रुचि रखते हैं.

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