गणेश चतुर्थी पर बक्सर में गूंजा गणपति बप्पा का जयघोष, संतान की लंबी उम्र के लिए महिलाओं ने रखा निर्जला व्रत

बक्सर में महिलाओं ने संतान की लंबी उम्र के लिए बहुला चतुर्थी का व्रत रखा और भगवान गणेश की विधि-विधान से पूजा-अर्चना की। जानिए इस व्रत का महत्व।

Buxar News : शहर समेत जिलेभर में सोमवार को गणेश चतुर्थी व्रत श्रद्धा और आस्था के साथ मनाया गया. इस अवसर पर महिलाओं ने संतान की दीर्घायु, सुख-समृद्धि और मंगल की कामना को लेकर निर्जला उपवास रखा. प्रथम पूज्य भगवान श्री गणेश की वैदिक विधि-विधान से पूजा-अर्चना की गयी. शाम को चंद्रोदय के बाद व्रती महिलाओं ने चंद्रमा को अर्घ्य अर्पित कर व्रत का पारण किया.

संतान के मंगल और दीर्घायु की कामना से रखा व्रत

गणेश चतुर्थी का व्रत भाद्रपद कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को मनाया जाता है. इसे बहुतीरा, बहुला या हेरंब चतुर्थी के नाम से भी जाना जाता है. मान्यता है कि इस दिन भगवान गणेश की पूजा करने से जीवन में आने वाले संकट और विघ्न दूर होते हैं. व्रती माताएं संतान के दीर्घायु और उनके सुखमय जीवन की कामना से पूरे दिन उपवास रखती हैं.

दूब, मोदक और लड्डू से हुआ गणपति का पूजन

व्रत को लेकर सुबह से ही महिलाओं ने गंगा स्नान कर भगवान गणेश की पूजा-अर्चना की. आचार्यों के सान्निध्य में विधि-विधान से पूजन संपन्न कराया गया. भगवान गणेश को दूब, मोदक और लड्डू सहित विभिन्न पूजन सामग्री अर्पित की गयी. इसके बाद व्रती महिलाओं ने गणेश चतुर्थी की कथा सुनी. घरों और पूजा स्थलों पर दिनभर धार्मिक माहौल बना रहा.

रामरेखा घाट और नाथ बाबा घाट पर उमड़ी भीड़

गणेश चतुर्थी को लेकर बक्सर के रामरेखा घाट, नाथ बाबा घाट समेत अन्य गंगा घाटों पर सुबह से ही व्रती महिलाओं की भीड़ देखने को मिली. महिलाओं ने गंगा में स्नान कर पूजा-अर्चना की और भगवान गणेश से परिवार की सुख-शांति तथा संतान की लंबी उम्र की कामना की. शाम के समय चंद्रोदय के बाद व्रतियों ने चंद्रमा को अर्घ्य देकर विधि-विधान से व्रत का समापन किया.

गणेश पूजा से दूर होते हैं जीवन के विघ्न

ज्योतिषाचार्य पं. मुन्ना जी चौबे ने बताया कि शास्त्रों में भाद्रपद कृष्ण चतुर्थी के व्रत का विशेष महत्व बताया गया है. मान्यता है कि इस व्रत के प्रभाव से संतान के जीवन में आने वाले संकट दूर होते हैं और भगवान श्री गणेश की कृपा से विद्या, बुद्धि एवं सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है. उन्होंने बताया कि चंद्रोदय के बाद चंद्रमा को अर्घ्य देने के उपरांत ही व्रत का पारण किया जाता है.

गाय के दूध से बने प्रसाद का विशेष महत्व

ज्योतिषाचार्य के अनुसार गणेश चतुर्थी व्रत में गाय के दूध से बने प्रसाद का भी विशेष महत्व माना गया है. श्रद्धा और विश्वास के साथ व्रत एवं पूजन करने से भगवान गजानन की कृपा प्राप्त होती है. इस दौरान बक्सर शहर के साथ ग्रामीण क्षेत्रों में भी महिलाओं ने पारंपरिक तरीके से गणेश चतुर्थी का व्रत किया और परिवार की सुख-समृद्धि के लिए भगवान गणेश से प्रार्थना की.

बक्सर के रामरेखाघाट पर चतुर्थी कि पूजा करतीं महिला व्रती | Prabhat Khabar Network

प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी

लेखक के बारे में

By ओंकार नाथ मिश्रा

Read More
ePaper

अपने दैनिक समाचार अनुभव को और बेहतरीन बनाएं

सिर्फ ₹399 ₹149

एक साल के लिए

आज ही सब्सक्राइब करें

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >