Buxar News: मंथरा के जाल में फंसी कैकेयी, दशरथ से मांगा राम का वनवास

नगर अंतर्गत चौसा बाजार रामलीला मंच पर चल रहे 101वें साल रामलीला समिति चौसा की ओर से आयोजित रामलीला में हर दिन बड़ी संख्या में दर्शकों की भीड़ उमड़ रही है

चौसा

. नगर अंतर्गत चौसा बाजार रामलीला मंच पर चल रहे 101वें साल रामलीला समिति चौसा की ओर से आयोजित रामलीला में हर दिन बड़ी संख्या में दर्शकों की भीड़ उमड़ रही है. सातवें दिन मंथरा-कैकई संवाद, राम वनवास, राजा दशरथ-कैकई संवाद और राजा दशरथ मरण तक की लीला का सुंदर मंचन हुआ. राम वनवास और राजा दशरथ मरण की लीला देख दर्शक भाव-विभोर हुए. स्थानीय युवकों के द्वारा मंचित उक्त प्रसंग में दिखाया गया कि दासी मंथरा ने रानी कैकई को राजा दशरथ से राम को वनवास और भरत को राज गद्दी का वन मांगने के लिए उकसाया. दासी के सिखाने पर रानी कैकई ने राजा दशरथ से वर मांगा. राम के वनवास जाते ही राजा दशरथ ने वियोग में अपने प्राण त्याग दिए.युवा कलाकारों के द्वारा कैकेयी कोप भवन प्रसंग में प्रभु आयोध्या के राजा दशरथ अपने बड़े सुपुत्र प्रभु श्रीराम को आयोध्या का युवराज घोषित करते है. इसकी सुचना कैकेयी की दासी मंथरा को मिलती है और मंथरा कैकेयी के कान भरने लगती है. और उन्हें भरत के लिए आयोध्या का राजगद्दी दिलाने के लिए किस प्रकार भड़काने लगती है. मंथरा के जाल और पुत्र मोह में फंस कैकेयी द्वारा राजा दशरथ से दो वरदान मांगा जाता है एक श्रीराम को वनवास और दुसरा भरत को राजगद्दी सौंपने की. राजा दशरथ कलेजे पर हाथ रख दोनों वरदान दे देते है और प्रभु श्रीराम पिता की आज्ञा मिलते ही वनवास के लिए निकल जाते है. प्रभु श्रीराम की वनवास जाते दृश्य को देख उपस्थित हजारों दर्शकों की आंखों से आंसू छलक उठता है.

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