‎Buxar News: अनुमंडलीय अस्पताल में अधूरी एमएनसीयू का उद्घाटन, ग्रामीणों में दिखी नाराजगी

डुमरांव अनुमंडलीय अस्पताल में मंगलवार को मातृ एवं नवजात शिशु देखभाल इकाई (एमएनसीयू) का उद्घाटन कर दिया गया.

डुमरांव

. डुमरांव अनुमंडलीय अस्पताल में मंगलवार को मातृ एवं नवजात शिशु देखभाल इकाई (एमएनसीयू) का उद्घाटन कर दिया गया. स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय ने वर्चुअल माध्यम से इस यूनिट का शुभारंभ किया. अस्पताल में 20 बेड व अत्याधुनिक मशीनें स्थापित की गई हैं, लेकिन डॉक्टर, नर्स और अन्य स्वास्थ्यकर्मियों की अनुपस्थिति के वजह से यह यूनिट फिलहाल सिर्फ कागजों पर ही चालू है. अस्पताल उपाधीक्षक डॉ. गिरीश कुमार सिंह ने बताया कि डेढ़ साल पहले ही विभाग को 4 डॉक्टर तथा 10 जीएनएम व 6 वार्ड बॉय की आवश्यकता के बारे में पत्र भेज कर विभाग को अवगत कराया गया था. लेकिन अभी तक स्वास्थ्य कर्मी व संसाधन की नियुक्ति नहीं हो सकी है. इसका नतीजा यह है कि मशीनें तो अस्पताल में पहुंच गई हैं लेकिन उन्हें संचालित करने के लिए कोई स्टाफ मौजूद नहीं है.

‎इसको लेकर ‎स्थानीय लोगों तथा स्वास्थ्यकर्मियों के बीच यह सवाल एक चर्चा का विषय बन गया है कि जब यूनिट चलाने के लिए स्टाफ ही नहीं है, तो उद्घाटन का मतलब क्या है? लोग इसे मात्र चुनावी राजनीति और सरकारी दिखावा बता रहे हैं. ग्रामीणों का कहना है कि जब तक इस यूनिट में चिकित्सक व नर्स की प्रतिनियुक्ति नहीं होती, तब तक इसका कोई लाभ नहीं मिलने वाला है. एमएनसीयू यूनिट की उपयोगिता को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं. अस्पताल में प्रतिदिन लगभग 20 की संख्या में प्रसव होते हैं, जिसमें कई बार देखने को मिला है कि जच्चा-बच्चा की हालत अति गंभीर हो जाती है. ऐसे में यह यूनिट जीवन दयानी साबित हो सकती थी, यदि इसको वास्तव में सही रूप से संचालित किया जाता तब .‎उद्घाटन के बाद से ही यूनिट में ताला बंद होने की डर ग्रामीणों को सता रही है. जनता को कहना हैं कि यह उद्घाटन नहीं, बल्कि एक चुनावी एजेंडा था. स्वास्थ मंत्री ने डिजिटल बटन दबाकर यूनिट का उद्घाटन तो कर दिया, लेकिन इलाज की सुविधाएं देने में सरकार असफल साबित होगी. डॉ. गिरीश ने कहा कि वे एक बार फिर वरीय अधिकारियों को पत्र के माध्यम से एचआर की मांग करेंगे. इस अधूरे उद्घाटन ने न सिर्फ स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि यह भी दर्शा दिया है कि योजनाओं को ज़मीन पर उतारने में सरकार कितनी गंभीर है. जनता अब यह नहीं पूछ रही कि यूनिट कब चलेगा, बल्कि यह अनुमान लगा रही है कि कब उसमें ताला बंद होगा. डुमरांव क्षेत्र के लोग इस तरह की वर्चुअल घोषणाओं के बजाय जमीनी सुधार की मांग कर रहे हैं, जिससे वास्तव में लोगों की जानें बचाई जा सके तथा स्वास्थ्य सेवाएं को और सशक्त बनाया जा सकें. उद्घाटन होते ही लोग आपस में बातचीत कर रहे थे कि अब देखना है कि इसका लाभ कब से मिलना शुरू होता है या इसमें ताला बंद हो जाता है

‎‎

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

प्रभात खबर डिजिटल प्रीमियम स्टोरी

लेखक के बारे में

By RAVIRANJAN KUMAR SINGH

RAVIRANJAN KUMAR SINGH is a contributor at Prabhat Khabar.

Tags

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >