बिहार में शिक्षक बहाली प्रक्रिया के नए नियमों और परीक्षा प्रारूप के खिलाफ पटना के गर्दनीबाग धरना स्थल पर चल रहे ‘छात्र न्याय सत्याग्रह’ को ऑल इंडिया स्टूडेंट्स फेडरेशन (AISF) ने अपना खुला समर्थन दिया है. आंदोलन को मजबूती देने के लिए एआईएसएफ के प्रदेश उपाध्यक्ष बबलू राज गुरुवार को धरना स्थल पहुंचे और आंदोलनरत शिक्षक अभ्यर्थियों से मुलाकात कर उनकी मांगों को पूरी तरह जायज ठहराया.
धरना स्थल पर अभ्यर्थियों को संबोधित करते हुए प्रदेश उपाध्यक्ष बबलू राज ने कहा कि बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) द्वारा प्रस्तावित प्री-मेन्स (दोहरी परीक्षा) और नेगेटिव मार्किंग की व्यवस्था से राज्यभर के लाखों शिक्षक अभ्यर्थियों में भारी आक्रोश है.
'युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ बंद करे सरकार'
एआईएसएफ नेता ने कहा कि वर्षों से कड़ा परिश्रम कर तैयारी में जुटे युवाओं के लिए एक-एक अंक निर्णायक होता है. ऐसे में भर्ती नियमों में अचानक बदलाव और नेगेटिव मार्किंग की व्यवस्था लागू करना उनके भविष्य के साथ सीधा खिलवाड़ है. उन्होंने सरकार से मांग की कि पूरी बहाली प्रक्रिया को पारदर्शी, निष्पक्ष और अभ्यर्थी हितैषी बनाया जाए.
अभ्यर्थियों की प्रमुख 4 सूत्री मांगें:
- एकल परीक्षा का आयोजन: प्री और मेन्स की दोहरी परीक्षा प्रणाली समाप्त कर केवल एक परीक्षा के आधार पर चयन किया जाए.
- नेगेटिव मार्किंग की समाप्ति: परीक्षा से नेगेटिव मार्किंग का प्रावधान पूरी तरह समाप्त किया जाए.
- रिक्तियों में बढ़ोतरी: शिक्षक बहाली में कुल रिक्त पदों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि की जाए.
- वंचित विषयों में पद सृजन: जिन विषयों में सीटें नहीं दी गई हैं, उनमें भी नए पद सृजित कर बहाली सुनिश्चित की जाए.
'हठ छोड़कर छात्रों से वार्ता करे सरकार'
बबलू राज ने कहा कि एआईएसएफ हमेशा छात्र-युवाओं के हक और अधिकार की लड़ाई में अग्रणी रहा है. उन्होंने स्पष्ट किया कि यह आंदोलन केवल कुछ हजार अभ्यर्थियों का नहीं, बल्कि बिहार के लाखों बेरोजगार युवाओं के भविष्य और रोजगार से जुड़ा हुआ है. उन्होंने सरकार से हठधर्मिता छोड़कर तत्काल आंदोलनरत छात्रों के प्रतिनिधिमंडल से वार्ता कर समाधान निकालने की मांग की.
इस दौरान बड़ी संख्या में उपस्थित शिक्षक अभ्यर्थियों ने अपनी समस्याओं और चिंताओं को एआईएसएफ प्रतिनिधिमंडल के समक्ष रखा तथा मांगें पूरी होने तक संघर्ष जारी रखने का संकल्प दोहराया.
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