लाइफ सपोर्ट के लिए तैयार हुआ सदर अस्पताल

पहल. अब गंभीर बीमारियों का भी होगा इलाज, पांच लाख की लागत से खरीदे गये उपकरण बनारस व पटना जाने की विवशता होगी खत्म बक्सर : सदर अस्पताल में इलाज के लिए आनेवाले मरीजों को अब रेफर से निजात मिल सकती है. इसके लिए अस्पताल प्रबंधन ने तैयारी शुरू कर दी है. अब अस्पताल में […]

पहल. अब गंभीर बीमारियों का भी होगा इलाज, पांच लाख की लागत से खरीदे गये उपकरण

बनारस व पटना जाने की विवशता होगी खत्म
बक्सर : सदर अस्पताल में इलाज के लिए आनेवाले मरीजों को अब रेफर से निजात मिल सकती है. इसके लिए अस्पताल प्रबंधन ने तैयारी शुरू कर दी है. अब अस्पताल में ह्रदय रोगियों को बेहतर इलाज के साथ ही क्रिटिकल कंडीशन (गंभीर हालात) में पहुंचे मरीजों को भी रेफर नहीं किया जायेगा. सरकार के निर्देश पर सदर अस्पताल के सिविल सर्जन ने आकस्मिक के दौरान इस्तेमाल होनेवाले जरूरी उपकरण की खरीदारी कर ली है. गंभीर रोगियों और उनके तीमारदारों को अब ज्यादा चिंता करने की जरूरत नहीं है. स्वास्थ्य विभाग ने दो एडवांस लाइफ सपोर्ट (एएलएस) एंबुलेंस वैन जिले को देने की अनुमति दी है.
इनका काम हृदय और श्वांस रोग जैसी गंभीर बीमारियों से परेशान लोगों को इलाज के लिए हेल्थ सेंटर तक ले जाना होगा. सिविल सर्जन डॉ बीके सिंह ने बताया कि जीपीएस सिस्टमवाली इस खास वैन में इसीजी से लेकर कार्डियक मॉनीटरिंग की लगभग सारी सुविधाएं हैं. अब वीवीआइपी लोगों के ट्रिटमेंट के लिए सदर अस्पताल को बक्सर या बनारस के अस्पतालों पर निर्भरता खत्म हो जायेगी.
एंबुलेंस में होंगे लाइफ सपोर्ट उपकरण : प्रदेश की सरकार ने हर जिले को दो-दो एडवांस लाइफ सपोर्ट वैन की सौगात देने का प्लान बनाया है. इसकी गाइडलाइन सरकार ने सिविल सर्जन को भेज दी है. इस वैन में वेंटीलेटर, सिरिंज पंप, मैनुअल व डिजिटल मशीन समेत कई आवश्यक उपकरण रहेंगे. इन वैनों का प्रयोग हृदय रोग, श्वांस रोग, नवजात बच्चों, प्रसव, सड़क हादसों, आग से जलने, जहरीला पदार्थ खाने के गंभीर मामलों पर किया जा सकेगा. इस वैन में इसीजी रिपोर्ट स्क्रीन पर देखी जा सकेगी. गंभीर रोगी की स्थिति में सरकारी चिकित्सक की एडवाइज पर एंबुलेंस में तैनात स्टाफ को बता दी जायेगी.
खरीदे गये दो सिरिंज पंप व डी फेबिरेटर : सदर अस्पताल में हृदय रोगियों की जांच के लिए पांच लाख की लागत से दो सिरिंज पंप मशीन, एक डी फेवीरेटर व 9 व्हील चेयर खरीदे गये हैं. इनका काम हृदय और श्वांस रोग जैसी गंभीर बीमारियों से परेशान लोगों को तत्काल इलाज करने के लिए किया जायेगा. इसके लिए सदर अस्पताल के डॉक्टरों को आवश्यक ट्रेनिंग भी दी जायेगी. सिविल सर्जन ने बताया कि इमरजेंसी विभाग में कार्यरत डॉक्टरों व अस्पताल स्टॉफ को इन मशीनों के इस्तेमाल की जानकारी उनके स्तर से दी जायेगी, ताकि मरीजों को समय रहते बेहतर चिकित्सकीय सहायता उपलब्ध हो सके. हालांकि, घटनास्थल तक पहुंचने के लिए 108 नंबर की एंबुलेंस ही उपयोग में लायी जायेगी. एएलएस वैन के लिए सीएस की अनुमति लेना जरूरी होगा.
खरीदे गये नौ व्हील चेयर : सदर अस्पताल में आनेवाले लाचार व दुर्घटनाग्रस्त मरीजों को इलाज के लिए लाने पर परिजनों द्वारा ही उसे टांग कर इमरजेंसी वार्ड में ले जाने की विवशता है. सदर अस्पताल में पूर्व में खरीदे गये व्हील चेयर खराब पड़े हुए हैं. कई बार मरीजों के परिजन चारपाई पर लादकर मरीज लेकर आते हैं. इसी को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने सदर अस्पताल को नौ व्हील चेयर मुहैया कराया है. अब शारीरिक नि:शक्त व लकवाग्रस्त लोगों को इसकी सुविधा दी जायेगी.
एएलएस और बीएलएस एंबुलेंस में होता है अंतर : एंबुलेंस का काम मरीजों को घर से अस्पताल या निचले स्तर के अस्पताल से ऊपरी स्तर के अस्पताल तक ले जाना है. जैसे पीएचसी से ब्लॉक और ब्लॉक से अनुमंडल फिर सदर अस्पताल. एंबुलेंस दो तरह के होते हैं एएलएस सुविधा यानी एडवांस लाइफ सपोर्ट और बीएलएस यानी बेसिक लाइफ सपोर्टवाले. एएलएस में वेंटिलेशन, सिरिंज पंप और कार्डियक मॉनीटर होता है, जबकि बीएलएस में वेंटिलेटर और सिरिंज पंप नहीं होता है.
जल्द शुरू होगी व्यवस्था
आकस्मिक स्थिति में मरीजों की जान बचाने के लिए अस्पताल में कई आवश्यक उपकरणों की खरीद की गयी है. लाइफ सर्पोट एंबुलेंस के लिए सरकार ने गाइड लाइन भेजी है. बहुत जल्द ही गंभीर रोगियों के इलाज की व्यवस्था शुरू हो जायेगी.
बीके सिंह, सिविल सर्जन, बक्सर

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