मशीनों की हुई खरीदारी, पर कचरे से जैविक खाद बनाने का कार्य पड़ा सुस्त

डुमरांव : शहर से निकले कूड़े-कचरे से जैविक खाद बनाने की योजना पर नगर पर्षद की चाल सुस्त पड़ गयी है. इस कार्य योजना को धरातल पर लाने के लिए लाखों रुपये खर्च हुआ. तीन जगहों पर कूड़ा डंपिंग केंद्र तैयार किये गये और इसके लिए मशीनों की खरीदारी भी की गयी लेकिन आठ माह […]

डुमरांव : शहर से निकले कूड़े-कचरे से जैविक खाद बनाने की योजना पर नगर पर्षद की चाल सुस्त पड़ गयी है. इस कार्य योजना को धरातल पर लाने के लिए लाखों रुपये खर्च हुआ.

तीन जगहों पर कूड़ा डंपिंग केंद्र तैयार किये गये और इसके लिए मशीनों की खरीदारी भी की गयी लेकिन आठ माह से अधिक दिन गुजरने के बाद भी खाद तैयार करने में नप उदासीन बनी रही. इस कार्ययोजना के आने से शहरी किसानों को अपने खेतों के लिए सस्ते दामों पर खाद मिलने की उम्मीद जगी थी.
यह खाद किसानों के खेतों के लिए सोना साबित होता और इसकी खरीद-बिक्री से नप प्रशासन को हजारों रुपये की राशि प्रति माह आमदनी होती. बताया जाता है कि शहर के छठिया पोखरा, खिरौली और ट्रेनिंग स्कूल के समीप नप द्वारा हर एक पर 7 लाख 50 हजार की राशि खर्च कर कूड़ा डंपिंग केंद्र का निर्माण कराया गया.
इसके साथ ही सेटिंग मशीन की भी खरीद हुई. बावजूद यह कार्ययोजना कछुएं की चाल चल रही है. जानकार बताते हैं कि कचरे से बने हुए खाद में जैविक तत्व अधिक होते हैं और यह मिट्टी की उर्वरा शक्ति को बढ़ाता है. डंपिंग केंद्र पर यह खाद चालीस दिनों के अंदर बनकर तैयार हो जाता है. शहर के 26 वार्डों में डोर-टू-डोर सूखे और गीले कचरे की उठाव को लेकर डस्टबीन लगे 52 रिक्शा गाड़ी को मंगाया गया है.
इसके जरिये सफाईकर्मी नीले चार डिब्बों में सूखा कचरा और हरे चार डब्बों में गीला कचरा का उठाव कर अलग-अलग जगहों पर डंप करेंगे. साथ ही घरों से निकलने वाले कचरों को भी अलग-अलग डब्बों में उठाकर रखने की योजना तैयार की गयी है. इसके लिए नप प्रशासन ने हर वार्डों के 280 परिवारों के बीच नीला व हरा डस्टबीन का वितरण किया लेकिन ताजुब की बात है कि सफाईकर्मियों को केवल सूखे कचरे ही प्राप्त होते है.
जल्द शुरू होगी यह योजना
कूड़े-कचरे से जैविक खाद बनाने की योजना जल्द शुरू की जायेगी. इसके लिए सेटिंग मशीन मंगायी गयी है. अन्य संसाधनों की खरीद पर बैठक के दौरान चर्चा की जायेगी. इसके लिए शहर में तीन कचरा डंपिंग केंद्र बनकर तैयार हो गये हैं. सुजीत कुमार, कार्यपालक पदाधिकारी, नप डुमरांव
जागरूकता में फिसड्डी रहा मिशन
नप प्रशासन ने स्वयं सहायता समूह की महिला टीम को तैयार कर नीले व हरे डस्टबीनों में अलग-अलग कचरा रखने के लिए जागरूकता अभियान चलाने का मिशन बनाया था, जिसमें सिटी मिशन प्रबंधक के साथ-साथ महिला टीम की भागीदारी दी गयी थी लेकिन नप का यह मिशन भी शिथिल रहा. इसके लिए समूह की महिलाओं को न ट्रेनिंग दी गयी और न ही इसकी सूची तैयार की गयी. अगर यह योजना शुरू होती तो कई महिलाओं को रोजगार मिलता.

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