बरौली : अभी मार्च का महीना समाप्त भी नहीं हुआ है और मौसम रंग दिखाने लगा है. क्षेत्रों के तालाब, नहर और चंवर सूख गये हैं. पशु-पक्षी पानी के लिए भटक रहे हैं. मार्च का महीना जून का एहसास करा रहा है. इसका मुख्य कारण है बरसात का न होना और समय से पहले तापमान में वृद्धि होना.
प्रखंड का सबसे बड़ा चंवर घोघिया, बघेजी, महम्मदपुर मटियारा, खजुरिया आदि में एक बूंद पानी नहीं है. क्षेत्र से गुजरने वाली सारण नहर, सिधवलिया वितरणी सहित अन्य सभी नहर पहले से ही पानी न आने के कारण प्यासी हैं. चंवर के ताल-तलैये भी सूख गये हैं.
तेजी से घट रहा जल स्तर
पर्यावरणविदों और वैज्ञानिकों की मानें तो भू-जल का दोहन तेजी से हो रहा है जिस कारण जल स्तर तेजी से घट रहा है. पुराने कुएं और तालाब पट से गये हैं और उनमें पानी नहीं जमा हो रहा है.
मनरेगा के तहत खोदे गये तालाब कारगर सिद्ध नहीं हो रहे हैं. इस वर्ष औसत से कम बारिश होने तथा वर्षा के जल ठहराव की उचित व्यवस्था न होने से जल संचय ठीक से नहीं हो रहा है और यही कारण है कि मार्च में ही चंवर आदि सूख गये.
अगर यही स्थिति रही तो पूरा क्षेत्र जल्द ही डार्क एरिया में चला जायेगा तथा खेतों के पटवन के लिए भी पानी नसीब नहीं होगा.
