डुमरांव : बसपा नेता सह जिला पार्षद सदस्य मिल्लू चौधरी हत्याकांड के आरोपित को एसटीएफ की टीम ने सोमवार की देर शाम बगेनगोला थाना क्षेत्र के बरुआ गांव से गिरफ्तार कर लिया. आरोपित बरुआ गांव निवासी तेजा यादव के पुत्र मंटू यादव बताया जाता है.
मंगलवार को डुमरांव थाने में पत्रकारों को जानकारी देते हुए एसडीपीओ केके सिंह ने बताया कि आरोपित बसपा नेता की हत्या में शामिल था और गत तीन वर्षों से अधिक दिनों से फरार चल रहा था.
आरोपित की गिरफ्तारी में स्थानीय पुलिस की अहम भूमिका रही है. आरोपित पर हत्या और आर्म्स एक्ट का दर्जनों मामला विभिन्न थानों में दर्ज है. उन्होंने बताया कि आरोपित एमसीसी का कमांडर रह चुका है और इस हत्याकांड के बाद फरार चल रहा था. फरार समय में भी आरोपित आपराधिक गतिविधियों में शामिल रहा है.
एसडीपीओ ने बताया कि बसपा नेता की हत्या को लेकर उनके परिजनों ने छह लोगों के खिलाफ नामजद प्राथमिकी दर्ज करायी थी, जिसमें बरुआ गांव के हरेंद्र चौधरी, लालबाबू चौधरी, मंटू यादव, रामबिहारी चौधरी, मुन्ना कुमार और जगनारायण चौधरी शामिल थे.
इन आरोपितों में मंटू यादव की गिरफ्तारी हुई जबकि अन्य नामजद आरोपित फरार है. पुलिस आरोपितों के खिलाफ छापेमारी कर रही है. मौके पर सर्किल इंस्पेक्टर एकरार अहमद खान, थानाध्यक्ष शिवनारायण राम सहित अन्य मौजूद थे.
शरीर में लगी थीं आठ गोलियां
29 अप्रैल, 2016 की शाम अपने वाहन से एक रिश्तेदार के बरात में शामिल होने जा रहे मिल्लू चौधरी को अपराधियों ने मठिला गांव के समीप वाहन पर ताबड़तोड़ गोलियां बरसायी थीं, जिसमें आगे बैठे मिल्लू के शरीर मे आठ गोलियां लगी थीं. इसके साथ ही दो अन्य लोग भी जख्मी हुए थे. इस घटना के बाद अनुमंडल इलाके में मिल्लू के समर्थकों के बीच कोहराम मच गया.
आनन-फानन जख्मियों को अनुमंडल अस्पताल लाया गया. जहां से डॉक्टरों ने प्राथमिक उपचार कर बक्सर रेफर कर दिया. रास्ते मे ही जख्मी मिल्लू चौधरी ने दम तोड़ दिया. सुबह में बसपा के समर्थकों ने बक्सर सड़क को जाम कर प्रदर्शन किया था.
बसपा के टिकट पर लड़ा था चुनाव
वर्ष 2015 के डुमरांव विधानसभा क्षेत्र से मिल्लू चौधरी ने बहुजन समाज पार्टी के टिकट पर चुनावी ताल ठोका था. इसके पूर्व वे जिला पार्षद चुनाव में विजयी हुए थे. चुनावी समीकरण में बसपा नेता ने अपनी सभा मे बसपा के कई दिग्गज नेताओं को डुमरांव बुलाया था.
चुनावी गिनती के बाद उन्हें हार का सामना करना पड़ा. हार के बाद भी बसपा नेता अपने समर्थकों के बीच घिरे रहते थे. वे इलाके में गरीबों के बीच लोकप्रिय नेता के रूप में जाने जाते थे.
