जिले में राम भरोसे है बैंकों और एटीएम की सुरक्षा

हाल. लूट की बढ़ती घटनाओं के बाद भी नहीं हो रहा सुधार बक्सर : बैंक लूट की बढ़ती घटनाओं के बाद शहर के बैंक और एटीएम की सुरक्षा का जायजा मंगलवार को प्रभात खबर टीम ने लिया. बैंकों की सुरक्षा शहर से लेकर गांवों तक राम भरोसे है. निजी से लेकर सरकारी बैंकों में सुरक्षा […]

हाल. लूट की बढ़ती घटनाओं के बाद भी नहीं हो रहा सुधार

बक्सर : बैंक लूट की बढ़ती घटनाओं के बाद शहर के बैंक और एटीएम की सुरक्षा का जायजा मंगलवार को प्रभात खबर टीम ने लिया. बैंकों की सुरक्षा शहर से लेकर गांवों तक राम भरोसे है. निजी से लेकर सरकारी बैंकों में सुरक्षा का घोर अभाव है. कई लोग बैंक में मुंह ढके और हेलमेट पहनकर भी बैंक में घुसते नजर आये. जिन्हें रोकने वाला कोई नजर नहीं आया. पुलिस प्रशासन की तरफ से साफ निर्देश है कि किसी को भी हेलमेट लगाये या मुंह ढके शख्स को बैंक के अंदर न घुसने नहीं दिया जाये. जिले के कई बैंकों में सीसीटीवी कैमरे नहीं हैं, जिनमें हैं वह भी चल नहीं रहे. बैंक, एटीएम में लगे गार्ड के हाथों में बंदूक तो छोड़ दें एक डंडा भी नहीं है.
गौरतलब हो कि प्रदेश के कई स्थानों में अभी हाल ही में बैंक में लूट, डकैती की वारदात हुई है. ऐसे में बक्सर का बैंक लुटेरों के लिए आसान टारगेट हो सकता है. क्योंकि यहां साफतौर पर देखा जा रहा है कि बैंक प्रबंधन लापरवाही बरत रहे हैं. कई बैंकों में तो गार्ड ही नहीं है. सड़क किनारे संचालित हो रहे बैंकों को ज्यादा खतरा है. कई ग्रामीण बैंकों में अलार्म तक की व्यवस्था नहीं की गयी है. पुलिस का भी मानना है कि दिन में लोगों की चहल-पहल के दौरान हादसे को अंजाम देना फिर भी एक नजरिये से चुनौती भरा होता है,
लेकिन रात के अंधेरे में वारदात को अंजाम देना आसानी हो जाता है. रात के अंधेरे में होने वाले गुपचुप हादसों के लिए बैंक में लगाये जाने वाला अलार्म बहुत ही उपयोगी साबित होता है. अलार्म बजते ही अलर्ट होकर पुलिस वहां पहुंच सकती है. और आम लोगों के जरिये भी मदद मिल सकती है. लेकिन कई बैंकों ने अपने ब्रांच में अलार्म तक की व्यवस्था नहीं करायी है. असुरक्षित हैं ग्रामीण क्षेत्रों की बैंक शाखाएं : ग्रामीण क्षेत्रों की शाखाएं सुरक्षा की दृष्टि से बेहद संवेदनशील है. ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के इरादे से सरकार ने बैंकों को सुदूर ग्रामीण क्षेत्रों में अपनी शाखाएं खोलने का निर्देश दिया है. करीब 100 बैंक शाखाएं जिले के उन सुदूरवर्ती क्षेत्रों में हैं,
जहां सुरक्षा की नाम मात्र भी गारंटी नहीं है. बाकी सब शाखाओं की सुरक्षा भी भगवान भरोसे है. ज्यादातर बैंकों में सुरक्षा के लिए सिर्फ एक गार्ड तैनात है. वह भी बैंकों द्वारा प्रतिनियुक्त. ज्यादातर बैंक शाखाओं की ओर पुलिस आमतौर पर झांकने भी नहीं जाती या फिर जाती है तो अपने काम भर से. शहरी क्षेत्र में स्थित बैंक शाखाओं की सुरक्षा की भी कोई गारंटी नहीं है. बैंकों की सुरक्षा को लेकर पुलिस अधीक्षक राकेश कुमार ने आदेश जारी किया था. आदेश में कहा गया था कि अब थाने में हर महीना पुलिस व बैंककर्मियों की बैठक होगी. जिसमें बैंक व बैंकों से संबंधित सुरक्षा के विषय पर चर्चा की जायेगी. इससे बैंकर्स व पुलिस के बीच संवादहीनता की शिकायत से निबटने में मदद मिलेगी तथा आपस में परामर्श व सुझाव का आदान-प्रदान होगा. यह बैठक प्रत्येक महीना के पहले बुधवार को की जाने की योजना थी. जबकि हर तीसरे माह में प्रथम बुधवार को जिला स्तर पर पुलिस कप्तान बैंककर्मियों के साथ मीटिंग करने का निर्णय लिया गया था. लेकिन वह आदेश थानों की फाइलों में दफन हो गया.

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By Prabhat Khabar Digital Desk

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