पड़ताल. कपड़ा और आभूषण व्यवसाय पर भी पड़ी मार, धीरे-धीरे हो रहा सामान्य
शहरी क्षेत्र में कैशलेस लेनदेन को मिला बढ़ावा
बक्सर : नोटबंदी के एक साल आज पूरे हो गये. प्रभात खबर ने नोटबंदी के एक साल बाद कुछ जगहों का मुआयना किया. यह जानने के लिए कि नोटबंदी के बाद सबसे ज्यादा असर किस तरह के कारोबार को प्रभावित किया. नोटबंदी के बाद कैसलेश लेनदेन को बढ़ावा मिला है लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों में जागरूकता के अभाव में कैसलेश का कार्य बेहतर ढंग से नहीं हो पाया है. आज भी लोग कैसलेश की जगह नकदी लेनदेन करने पर ही भरोसा कर रहे हैं. कपड़ा और आभूषण व्यवसाय पर भी इसका असर पड़ा है. नोटबंदी के पहले जहां दुकानदारों का सालाना टर्न ओवर 20 लाख का था. वहीं वह घटकर 12 लाख के आसपास आ गया है लेकिन अब व्यवसायी स्थिति को सामान्य बता रहे हैं. ग्रामीण क्षेत्रों में कैसलेश लेनदेन के बढ़ावे के प्रति लोगों में जागरूकता फैलाने की आवश्यकता है.
सरकारी संस्थान भी नहीं हुए पूरी तरह से कैसलेश : आठ नवंबर 2016 को नोटबंदी के बाद केंद्र सरकार ने यह फैसला लिया था कि सभी केंद्रीय संस्थानों को सबसे पहले कैसलेश किया जायेगा लेकिन इसका जीता जागता उदाहरण बक्सर रेलवे स्टेशन पर देखने को मिला, जहां टिकट खरीदने में लोग कैश का ही लेनदेन कर रहे थे. कैश काउंटर पर एक भी स्वेप मशीन अब तक नहीं लगायी गयी है. जिस कारण अभी भी लाइन में लग कर लोग टिकट खरीद रहे हैं.
रजिस्ट्री ऑफिस को हुआ छह करोड़ 40 लाख का नुकसान : नोटबंदी के पहले 8.11.2015 से 7.11.2016 तक कुल 13 हजार 956 रजिस्ट्री हुई थी. जबकि यह आंकड़ा इस साल 13 हजार 316 के पास है. इससे सरकार को अकेले बक्सर जिले में छह करोड़ 40 लाख के राजस्व का नुकसान हुआ है. इसी तरह आभूषण व्यवसाय में भी 15 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गयी है. कपड़ा व्यवसाय में भी गिरावट आयी है.
आंकड़े एक नजर में
बक्सर शहर में छोटे-बड़े दुकानों की संख्या 1500 के आसपास है.
कैसलेश हुईं 100 दुकानें
नोटबंदी के बाद 800 दुकानदारों ने स्वेप मशीन के लिए किया आवेदन
बैंकों में कैसलेश लेनदेन को मिला बढ़ावा.
एक्सपर्ट व्यू
नकदी की कमी की वजह से प्रोपर्टी की खरीद बिक्री में कमी आयी है. ऑनलाइन रजिस्ट्री के बावजूद भुगतान तो नकद ही करना पड़ता है लेकिन बाजार में मुद्रा की तरलता बढ़ती है या फिर कैसलेश ट्रांजेक्शन की पूरी पुख्ता व्यवस्था होती है तो धीरे-धीरे यह ठीक हो जायेगा. रजिस्ट्री से सरकार को राजस्व मिलता है.
सौरभ टिबरेवाल, सीए
