चावल-गुड़ की खीर और रोटी खा व्रती करेंगी उपवास

डुमरांव : लोक आस्था का महापर्व छठ साल में दो बार मनाया जाता है. पहली बार चैत के महीने में और दूसरी बार कार्तिक महीने में. भगवान सूर्य की उपासना के साथ छठ पर्व की शुरुआत होती है. हिंदू धर्म में किसी भी पर्व की शुरुआत स्नान के साथ ही होती है और यह पर्व […]

डुमरांव : लोक आस्था का महापर्व छठ साल में दो बार मनाया जाता है. पहली बार चैत के महीने में और दूसरी बार कार्तिक महीने में. भगवान सूर्य की उपासना के साथ छठ पर्व की शुरुआत होती है. हिंदू धर्म में किसी भी पर्व की शुरुआत स्नान के साथ ही होती है और यह पर्व भी स्नान यानी नहाय-खाय के साथ होता है.

कार्तिक महीने में छठ मानने का विशेष महत्व है. छठव्रतीयों ने मंगलवार को सबसे पहले घर की पूरी तरह से सफाई की. सुबह नदी, तालाब, कुआं या चापाकल पर नहाने के बाद शुद्ध वस्त्र को पहना. व्रती महिलाओं ने चना की दाल और लौकी की सब्जी शुद्ध घी में बनायी. उसमें सेंधा नमक डाला. इसके बाद गणेश जी और सूर्य भगवान को भोग लगाकर व्रतियों ने सेवन किया और मुहल्ले में आस-पास घरों में प्रसाद का वितरण किया.

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